सोलन-सिरमौर में बारिश और बर्फबारी: लहसुन, सेब और रबी फसलों को मिला नया जीवन

On: January 26, 2026 11:45 AM
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सोलन-सिरमौर में बारिश और बर्फबारी
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सोलन: विशेष रिपोर्ट

हिमाचल प्रदेश के निचले और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम का मिजाज बदलते ही किसानों और बागवानों के चेहरे खिल उठे हैं। लंबे समय से चल रहे सूखे के स्पेल (Dry Spell) के बाद सोलन और सिरमौर जिलों में हुई व्यापक बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी ने कृषि और बागवानी क्षेत्र को एक नई संजीवनी प्रदान की है। यह बदलाव न केवल तापमान में गिरावट लेकर आया है, बल्कि हिमाचल की ग्रामीण आर्थिकी की रीढ़ मानी जाने वाली लहसुन, सेब, गेहूं और मटर की फसलों के लिए अमृत के समान साबित हो रहा है।

सोलन जिले में फसलों की स्थिति: गेहूं और मटर को राहत

सोलन जिले के कृषि उपनिदेशक डॉ. देवराज कश्यप और उद्यान विभाग की विशेषज्ञों के अनुसार, यह बारिश रबी की मुख्य फसलों के लिए बेहद जरूरी थी। सोलन जिले में लगभग 25,400 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बिजाई की जाती है, जो यहाँ की प्रमुख रबी फसल है। विशेषकर बद्दी, बरोटीवाला और नालागढ़ (BBN) जैसे मैदानी इलाकों में गेहूं की फसल पर सूखे का खतरा मंडरा रहा था, लेकिन इस बारिश ने उत्पादन गिरने की आशंका को समाप्त कर दिया है।

इसके अतिरिक्त, जिले में 1643 हेक्टेयर में मटर की खेती होती है। मटर की फसल को फूल आने और फली बनने के समय नमी की सख्त आवश्यकता होती है, जो इस बारिश से पूरी हो गई है। जिले के अर्की, कुनिहार और धर्मपुर क्षेत्रों में किसान इस प्राकृतिक सिंचाई से बेहद खुश हैं।

सिरमौर का ‘सफेद सोना’ और सेब के नए बगीचे

पड़ोसी जिले सिरमौर की बात करें तो यहाँ की आर्थिकी का मुख्य आधार लहसुन की खेती है। सिरमौर के लहसुन को ‘सफेद सोना’ कहा जाता है और इसकी मांग दक्षिण भारत तक रहती है। पिछले दो महीनों से बारिश न होने के कारण लहसुन की गांठों (Bulbs) का विकास रुकने का डर था। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अब मिट्टी में पर्याप्त नमी होने से लहसुन की फसल की गुणवत्ता और वजन दोनों में सुधार होगा।

वहीं, सिरमौर के राजगढ़, नोहराधार, हरिपुरधार और शिलाई जैसे क्षेत्रों में बागवानी के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। यहाँ पारंपरिक बगीचों के स्थान पर एप्पल रूटस्टॉक (Apple Rootstock) पर आधारित उच्च घनत्व (High Density) वाले सेब के बगीचे तेजी से लगाए जा रहे हैं। नए लगाए गए इन पौधों की जड़ों को जमने के लिए निरंतर नमी की आवश्यकता होती है। हालिया बर्फबारी और बारिश ने इन नए पौधों के अस्तित्व और विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर दी हैं।

बागवानी के लिए ‘चिलिंग आवर्स’ का महत्व

पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी बागवानों के लिए खुशहाली का पैगाम लेकर आई है। चायल, कसौली, और सिरमौर की ऊंची चोटियों पर हुआ हिमपात सेब और अन्य गुठलीदार फलों (Stone Fruits) जैसे प्लम, आडू और खुमानी के लिए आवश्यक ‘चिलिंग आवर्स’ (एक निश्चित समय तक ठंडक) को पूरा करने में मदद करेगा। उद्यान विभाग की उपनिदेशक डॉ. शिवाली ठाकुर ने बताया कि जो बागवान नए पौधे लगाना चाहते हैं, उनके लिए यह सर्वोत्तम समय है। जमीन में नमी होने से पौधों के सूखने की संभावना शून्य हो जाती है और ग्रोथ (वृद्धि) बेहतर होती है।

विशेषज्ञों की किसानों को सलाह

कृषि और उद्यान विभाग ने किसानों को इस समय का लाभ उठाने की सलाह दी है:

  1. उर्वरक का उपयोग: बारिश के बाद नमी होने पर गेहूं और अन्य फसलों में खाद (जैसे यूरिया) का छिड़काव करना अधिक प्रभावी होता है।
  2. नया पौधरोपण: सेब और अन्य फलदार पौधों के लिए खोदे गए गड्ढों में अब पौधरोपण का कार्य तेजी से पूरा किया जा सकता है।
  3. निकासी का प्रबंध: मैदानी क्षेत्रों में जहां पानी रुकने की संभावना हो, वहां जल निकासी का उचित प्रबंध करें ताकि जड़ों में सड़न न पैदा हो।
अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

हिमाचल प्रदेश की जीडीपी में कृषि और बागवानी का योगदान महत्वपूर्ण है। सोलन और सिरमौर जैसे जिले न केवल राज्य बल्कि पूरे देश को बेमौसमी सब्जियां और फल निर्यात करते हैं। यदि सूखा जारी रहता, तो इसका सीधा असर स्थानीय मंडियों और उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता। अब अच्छी फसल की उम्मीद से न केवल किसानों की आय सुरक्षित हुई है, बल्कि आने वाले समय में बाजार में सब्जियों और फलों की आपूर्ति भी सामान्य रहेगी।


कुल मिलाकर, सोलन के गेहूं-मटर और सिरमौर के लहसुन-सेब के लिए यह मौसम कुदरत का उपहार है। हालांकि शीतलहर से जनजीवन थोड़ा प्रभावित हुआ है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से यह बारिश और बर्फबारी हिमाचल की खुशहाली के द्वार खोल रही है। किसान अब अपनी फसलों की बेहतर पैदावार को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रहे हैं।

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Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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