हिमालयन डॉन संवाददाता, शिमला: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के हालिया फैसले को कर्मचारियों और पेंशनरों के अधिकारों के लिए ऐतिहासिक बताया जा रहा है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व प्रांत महामंत्री डॉ. मामराज पुंडीर ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार से कर्मचारियों के लंबित डीए, वेतन एरियर और अन्य देय लाभ तुरंत जारी करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि Punjab and Haryana High Court ने 08 अप्रैल 2026 को CWP-7291-2026, CWP-9514-2026 तथा CWP-10301-2026 मामलों में सुनाए गए फैसले में स्पष्ट किया है कि Dearness Allowance (DA) और Dearness Relief (DR) कर्मचारियों एवं पेंशनरों का वैधानिक और संवैधानिक अधिकार है। अदालत ने यह भी माना कि सरकारें वित्तीय संकट का हवाला देकर इन अधिकारों को लंबे समय तक नहीं रोक सकतीं।
डॉ. पुंडीर ने कहा कि केंद्र सरकार के पैटर्न पर डीए देने की नीति स्वीकार करने के बाद उसे लागू करना राज्य सरकारों की संवैधानिक जिम्मेदारी बन जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में कर्मचारियों और पेंशनरों को अब भी करीब 15 प्रतिशत कम डीए मिल रहा है तथा जनवरी 2022 से लंबित वेतन एरियर और डीए एरियर का भुगतान नहीं किया गया है।
उन्होंने दावा किया कि लंबित भुगतान के कारण प्रत्येक कर्मचारी पर लगभग 15 लाख रुपये से अधिक की देनदारी बन चुकी है और कर्मचारियों को हर महीने औसतन 15 हजार रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
डॉ. पुंडीर ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पुरानी पेंशन बहाली के नाम पर कर्मचारियों को गुमराह किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि कर्मचारियों को अपने वैध आर्थिक अधिकारों के लिए न्यायालय की शरण लेनी पड़ रही है। यदि सरकार कर्मचारियों के हितों को लेकर गंभीर होती तो लंबित डीए, एरियर और अन्य वित्तीय लाभ समय पर जारी किए जाते।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला स्पष्ट संकेत देता है कि कर्मचारियों के वैध अधिकारों को अधिक समय तक रोका नहीं जा सकता। यदि हिमाचल सरकार ने जल्द लंबित डीए, वेतन एरियर और अन्य देय लाभ जारी नहीं किए तो कर्मचारियों में भारी असंतोष पैदा हो सकता है।
डॉ. मामराज पुंडीर ने सरकार से मांग की कि प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों को केंद्र सरकार के अनुरूप सभी लंबित डीए/डीआर, वेतन एरियर और अन्य आर्थिक लाभ तुरंत प्रभाव से जारी किए जाएं, ताकि उन्हें आर्थिक राहत मिल सके और उनके साथ न्याय सुनिश्चित हो सके।
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