हिमाचल प्रदेश की ग्राम सभा में पेयजल शुल्क प्रस्ताव लाने की तेयारी

हिमाचल पंचायतों में मुफ्त पानी का दौर खत्म: पेयजल शुल्क वसूलने की तैयारी, दरें तय

Solan

सोलन: प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से मिल रही मुफ्त पानी की सुविधा अब खत्म होने जा रही है। राज्य सरकार ने पंचायतों के माध्यम से पेयजल शुल्क (Water Cess) वसूलने की मुकम्मल तैयारी कर ली है। इस नई व्यवस्था के तहत अब ग्रामीणों को हर महीने पानी का बिल चुकाना होगा, जिसके लिए पंचायती राज विभाग ने सभी जिला पंचायत अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं।

शुल्क का प्रस्तावित ढांचा

सरकार द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट के अनुसार, आर्थिक श्रेणी के आधार पर शुल्क की दरें तय की गई हैं:

  • APL परिवार: 100 रुपये प्रति माह।
  • BPL परिवार: 25 रुपये प्रति माह।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये दरें स्थिर नहीं रहेंगी; सरकार समय-समय पर इनमें संशोधन कर सकती है। खास बात यह है कि यह शुल्क जल शक्ति विभाग के बजाय सीधे पंचायतों द्वारा वसूला जाएगा।

ग्राम सभाओं से लेनी होगी ‘अग्निपरीक्षा’

हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करना इतना आसान नहीं होगा। सरकार ने निर्देश दिया है कि शुल्क वसूली की प्रक्रिया शुरू करने से पहले प्रत्येक पंचायत में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाएगा। इन बैठकों में ग्रामीणों के बीच प्रस्ताव रखा जाएगा और चर्चा के बाद इसे पारित कराने का प्रयास होगा। लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बनाए रखने के लिए ग्राम सभा के सदस्यों में से ही किसी एक को अध्यक्ष चुनकर इस पर मुहर लगवाई जाएगी।

डिजिटल पोर्टल पर दर्ज होगी रिपोर्ट

पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित होते ही उसे तुरंत ‘ई-ग्राम स्वराज पोर्टल’ पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। खंड विकास अधिकारियों (BDOs) को आदेश दिए गए हैं कि वे बैठकों की रिपोर्ट तुरंत मुख्यालय भेजें। एकत्रित किए गए शुल्क को बाद में जल शक्ति विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी।

“विभाग की ओर से इस संबंध में पत्र प्राप्त हुआ है, जिसे आगामी कार्रवाई के लिए सभी पंचायतों को भेज दिया गया है। आने वाले दिनों में विशेष ग्राम सभाएं बुलाई जा रही हैं। वर्तमान में जो दरें बताई गई हैं, वे प्रारंभिक हैं; वास्तविक स्थिति ग्राम सभाओं के फीडबैक के बाद ही स्पष्ट होगी।” — जोगिंदर राणा, जिला पंचायत अधिकारी, सोलन

मुफ्त पानी के दौर पर लगेगा विराम

गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में वर्तमान में जल शक्ति विभाग द्वारा पानी की आपूर्ति की जा रही है। पहले विभाग नाममात्र शुल्क लेता था, जिसे बाद में सरकार ने पूरी तरह मुफ्त कर दिया था। अब वित्तीय प्रबंधन और संसाधनों के रखरखाव के नाम पर दोबारा शुल्क वसूली की तैयारी है, जिसे लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज होना तय है।

यह भी पढ़ें:- हिमाचल में नया नियम: मनरेगा में 50 दिन काम करने वाले परिवार बीपीएल में होंगे शामिल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *