नौणी विवि में मंथन: विलुप्त होते औषधीय पौधों को बचाने के लिए जुटे वैज्ञानिक, वन अधिकारी और किसान

On: March 29, 2026 11:16 AM
हमें फॉलो करें:
नौणी-विश्वविद्यालय-में-औषधीय-पौधों-पर-कार्यशाला-सोलन
--विज्ञापन यहां--

Whatsapp Channel

Join Now

Telegram Group

Join Now

सोलन: (हिमालयन डॉन ब्यूरो) डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में प्रदेश की बहुमूल्य औषधीय संपदा को सहेजने के लिए एक विशेष राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। “किसान सहभागिता के माध्यम से विलुप्तप्राय औषधीय एवं सुगंधित पौधों (MAPs) का रणनीतिक प्राथमिकता निर्धारण” विषय पर आयोजित इस इंटरएक्टिव बैठक में वन विभाग के सहयोग से वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं वन बल प्रमुख डॉ. संजय सूद ने हिमाचल में औषधीय खेती की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण कई महत्वपूर्ण औषधीय पौधों के प्राकृतिक आवास खतरे में हैं, ऐसे में वैज्ञानिक अनुसंधान को सीधे किसानों की जरूरतों से जोड़ना अनिवार्य है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जाइका (JICA) वानिकी परियोजना औषधीय पौधों पर शोध के लिए हर संभव वित्तीय और तकनीकी सहयोग प्रदान करेगी।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने इस अवसर पर कहा कि औषधीय पौधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कृषि योग्य भूमि की कमी को देखते हुए प्राकृतिक खेती और अंतराफसलीकरण (Intercropping) अपनाने पर जोर दिया। इस दौरान वन उत्पाद विभाग के प्रमुख डॉ. यशपाल शर्मा ने जानकारी दी कि विश्वविद्यालय वर्तमान में 32 औषधीय पौधों पर कार्य कर रहा है और कई दुर्लभ प्रजातियों की नर्सरी तकनीक विकसित की जा चुकी है।

कार्यशाला के दौरान डॉ. संजय सूद ने वन विभाग के सहयोग से नवनिर्मित ‘वन संसाधन एवं पर्यावरण उद्यमिता केंद्र’ का उद्घाटन भी किया। कार्यक्रम के विशेष आकर्षण में प्रदेश के पांच प्रगतिशील किसानों—पवन कुमार (चंबा), ओम प्रकाश (कांगड़ा), राजेश कुमार कंवर व हरदेश बत्रा (सिरमौर) और कृपाल सिंह (शिमला) को औषधीय खेती में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। साथ ही किसानों को चिरायता और कलिहारी जैसी दुर्लभ प्रजातियों की पौध सामग्री वितरित की गई।

तकनीकी सत्रों में हिमालयन फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट के डॉ. संदीप शर्मा, जाइका के मार्केटिंग प्रबंधक डॉ. राजेश चौहान और पूर्व प्रोफेसर डॉ. रविंदर रैना ने संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण की रणनीति साझा की। इस मौके पर वानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. सी.एल. ठाकुर, वन संरक्षक सोलन नरेंद्र प्रकाश भरोट सहित विश्वविद्यालय के कई वैधानिक अधिकारी और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें:- जनजातीय अधिकारों और न्याय पर HPNLU शिमला में राष्ट्रीय मंथन, सरकार और विश्वविद्यालय के बीच हुआ अहम समझौता

Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

व्हाट्सएप से जुड़ें

अभी जुड़ें

टेलीग्राम से जुड़ें

अभी जुड़ें

इंस्टाग्राम से जुड़ें

अभी जुड़ें