मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू एक प्रदर्शनी स्टाल पर हिमाचली स्टार्ट-अप उत्पादों का निरीक्षण करते हुए और उद्यमियों से चर्चा करते हुए।

हिमाचल में नवाचार से उद्यमिता को नई उड़ान, ‘स्टार्ट-अप स्टेट’ के रूप में उभरा प्रदेश

Himachal

शिमला | हिमालयन डॉन, मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश औद्योगिक विकास और नवाचार के एक नए युग की ओर अग्रसर है। राज्य सरकार द्वारा स्टार्ट-अप ईको सिस्टम को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों के चलते हिमाचल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की हालिया स्टार्ट-अप रैंकिंग में हिमाचल को ‘उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्यों’ की श्रेणी में शामिल किया गया है, जो प्रदेश की बदलती आर्थिक तस्वीर का प्रमाण है।

​स्टार्ट-अप्स को मिलेगा ‘हिम’ का सहारा

​राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में युवाओं के लिए विशेष प्रावधान किए हैं। नई ‘हिम स्टार्ट-अप स्कीम’ के माध्यम से प्रदेश के उभरते उद्यमियों और इन्क्यूवेटरों को वित्तीय व गैर-वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। हाल ही में संपन्न हुए ‘हिम एमएसएमई फेस्ट-2026’ की सफलता ने स्थानीय उद्यमियों के आत्मविश्वास को बढ़ाकर राज्य के निवेश वातावरण को और अधिक सुदृढ़ किया है।

​ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल: वन डिस्ट्रिक्ट थ्री प्रोडक्ट्स

​ग्रामीण स्तर पर अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ‘वन डिस्ट्रिक्ट थ्री प्रोडक्ट्स’ (ODTP) कार्यक्रम शुरू करने जा रही है।

  • उद्देश्य: स्थानीय उत्पादों की वैल्यू चेन और वैल्यू एडिशन को मजबूत करना।
  • रणनीति: प्रत्येक जिला तीन विशिष्ट उत्पादों की पहचान करेगा।
  • लाभ: इन उत्पादों को औद्योगिक नीति के तहत विशेष सहायता दी जाएगी, जिससे स्थानीय खरीद बढ़ेगी और ग्रामीण रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

​रेशम उत्पादन और कौशल विकास पर केंद्रित पहल

​रेशम उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए ‘हिम सिल्क मिशन’ का आगाज किया जा रहा है, जिसके लिए 2 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस मिशन में विशेष रूप से अनुसूचित जाति के लाभार्थियों को शामिल कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा।

​वहीं, युवाओं के कौशल विकास के लिए उद्योग विभाग 10 हजार हिमाचली युवाओं को प्रशिक्षित करेगा। एनएसडीसी (NSDC) और सीएसआर (CSR) फंड के सहयोग से संचालित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रत्येक प्रशिक्षु को 2,000 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड भी दिया जाएगा।

​हरित उद्योग और पर्यटन पर विशेष फोकस

​प्रदेश की संवेदनशील भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार हरित उद्योगों (Green Industries) को प्राथमिकता दे रही है। साथ ही, पर्यटन और आतिथ्य सत्कार (Hospitality) के क्षेत्र में बड़े निवेश को आकर्षित करने के लिए उद्योगपतियों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सरकार का यह समग्र दृष्टिकोण न केवल ‘आत्मनिर्भर हिमाचल’ की नींव रख रहा है, बल्कि युवाओं के लिए घर-द्वार पर रोजगार सुनिश्चित कर रहा है।

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