नवंबर से डिपुओं में 179 रुपये प्रति लीटर मिलेगा सरसों का तेल, एपीएल राशन कार्ड धारकों को अब 14 किलो आटा
धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी राशन डिपुओं से राशन लेने वाले उपभोक्ताओं को नवंबर महीने में महंगाई का झटका लगने जा रहा है। डिपुओं में सरसों के तेल की कीमत में 19 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। अब उपभोक्ताओं को एक लीटर सरसों के तेल के लिए 160 रुपये के बजाय 179 रुपये चुकाने होंगे। हालांकि, इस बीच एपीएल (गरीबी रेखा से ऊपर) श्रेणी के राशन कार्ड धारकों को आटे के कोटे में राहत दी गई है।
सरसों के तेल के लिए अब देने होंगे 179 रुपये
सरसों के तेल की कीमत में हुई बढ़ोतरी से राशन डिपुओं पर निर्भर परिवारों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। बाजार में सरसों के तेल की कीमतों में बढ़ोतरी को इसका प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
खाद्य आपूर्ति निगम के महाप्रबंधक अरविंद शर्मा के अनुसार, निगम की ओर से कम कीमत की पेशकश करने वाली कंपनियों के साथ भी टेंडर किए गए हैं। इसके बावजूद सरसों के तेल की कीमत 179 रुपये प्रति लीटर निर्धारित की गई है।
प्रदेश में 19.5 लाख उपभोक्ता
हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत लगभग 19.5 लाख उपभोक्ता जुड़े हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रदेश में हर महीने सरसों के तेल की खपत लगभग 30 हजार लीटर बताई गई है।
पिछले करीब सात महीनों से रिफाइंड तेल उपलब्ध नहीं होने के कारण उपभोक्ताओं को केवल सरसों का तेल दिया जा रहा है। वर्तमान व्यवस्था के तहत उपभोक्ताओं को दो लीटर सरसों का तेल उपलब्ध करवाया जा रहा है।
इस बार सरसों के तेल की आपूर्ति के लिए गोकुल एग्री इंटरनेशनल लिमिटेड और शक्ति न्यूट्रिशंस प्राइवेट लिमिटेड को टेंडर दिए गए हैं।
एपीएल परिवारों को एक किलो अतिरिक्त आटा
सरसों के तेल की कीमत बढ़ने के बीच एपीएल राशन कार्ड धारकों को आटे के कोटे में राहत दी गई है। नवंबर महीने से इन परिवारों को पहले के मुकाबले एक किलो अतिरिक्त आटा मिलेगा।
अक्तूबर महीने में एपीएल उपभोक्ताओं को 13 किलो आटा दिया गया था, जबकि नवंबर से यह कोटा बढ़ाकर 14 किलो कर दिया गया है।
उपभोक्ताओं पर महंगाई का दोहरा असर
एक ओर सरसों के तेल की कीमत बढ़ने से उपभोक्ताओं को अधिक खर्च करना पड़ेगा, वहीं एपीएल परिवारों को आटे के कोटे में बढ़ोतरी से कुछ राहत मिलेगी। ऐसे में राशन डिपुओं से मिलने वाली खाद्य सामग्री की कीमतें और मात्रा दोनों ही उपभोक्ताओं के घरेलू बजट को प्रभावित करेंगी।
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