हिमालयन डॉन, शिमला।
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग अप्रैल के तीसरे सप्ताह में चुनाव अधिसूचना जारी कर सकता है। संभावित कार्यक्रम के अनुसार 20 अप्रैल तक पहले चरण के लिए मतदाता सूचियों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा, जबकि मतदान प्रक्रिया 15 मई के बाद शुरू होने की संभावना है। चुनाव तीन चरणों में संपन्न कराए जा सकते हैं।
इस बीच, आयोग बुजुर्ग और असहाय मतदाताओं के लिए घर बैठे मतदान (होम वोटिंग) की सुविधा लागू करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। हालांकि, इस व्यवस्था को लागू करने में कई व्यावहारिक चुनौतियां सामने आ रही हैं। प्रदेश के लगभग 22 हजार पंचायत वार्डों में इस सुविधा को लागू करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ, विशेष प्रशिक्षण और पर्याप्त समय की आवश्यकता होगी, जो फिलहाल सीमित संसाधनों के चलते चुनौती बना हुआ है।
गौरतलब है कि 80 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं के लिए घर बैठे मतदान की व्यवस्था पहले से ही विधानसभा और लोकसभा चुनावों में लागू है। कई राज्यों ने इसे सफलतापूर्वक अपनाया भी है, लेकिन हिमाचल प्रदेश में पंचायत स्तर पर इसे लागू करने को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
अलग-अलग चरणों में होंगे पंचायत और नगर निकाय चुनाव
सूत्रों के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत और शहरी निकाय चुनावों को अलग-अलग चरणों में कराने की तैयारी कर रहा है। इसका उद्देश्य चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है। आयोग जल्द ही संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर चुनाव कार्यक्रम को अंतिम रूप देगा।
चुनावी नियमों के तहत मतदान से करीब 28 से 30 दिन पहले आचार संहिता लागू करनी होती है। ऐसे में हिमाचल दिवस के बाद कभी भी चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा हो सकती है। पंचायतों और शहरी निकायों के लिए आरक्षण रोस्टर पहले ही जारी किया जा चुका है, जबकि मतदाता सूचियों के अद्यतन का कार्य तेजी से जारी है।
31 मई से पहले पूरी करनी होगी चुनाव प्रक्रिया
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार प्रदेश में पंचायत चुनावों की पूरी प्रक्रिया 31 मई से पहले संपन्न करना अनिवार्य है। इसी समयसीमा को ध्यान में रखते हुए आयोग सभी तैयारियों को तेजी से अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है।
यदि बुजुर्गों के लिए घर बैठे मतदान की सुविधा लागू होती है, तो यह प्रदेश के हजारों वरिष्ठ नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। वहीं, आयोग के सामने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना भी एक अहम जिम्मेदारी होगी।
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