हिमालयन डॉन संवाददाता, सोलन | जनगणना कार्य निदेशालय हिमाचल प्रदेश की निदेशक दीप शिखा शर्मा ने कहा कि जनगणना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की प्रगति का वास्तविक आधार है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सटीक आंकड़े ही राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर उचित वित्त प्रबंधन और पात्र व्यक्तियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
दीप शिखा शर्मा आज सोलन में जनगणना-2027 के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित कर रही थीं।
पूर्णतः डिजिटल होगी आगामी जनगणना
निदेशक ने जानकारी दी कि लगभग 16 वर्षों के अंतराल के बाद होने वाली यह जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी। उन्होंने इस बार की सबसे बड़ी विशेषता का उल्लेख करते हुए बताया कि:
- स्व-गणना (Self-Enumeration): जनगणना-2027 में पहली बार आम नागरिक स्वयं ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
- यह डिजिटल पहल न केवल प्रक्रिया को सुगम बनाएगी, बल्कि डेटा की सटीकता को भी बढ़ाएगी।
प्रशिक्षण और फील्ड ट्रेनर की भूमिका
प्रशिक्षणार्थियों को प्रेरित करते हुए दीप शिखा शर्मा ने कहा कि अधिकारी और कर्मचारी इस कार्य को बोझ न समझें, बल्कि इसे ज्ञानार्जन का एक अवसर मानें। उन्होंने कहा कि फील्ड ट्रेनर्स की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्हीं के कंधों पर डेटा संकलन की शुद्धता की जिम्मेदारी है। किसी भी तकनीकी शंका के समाधान के लिए उन्होंने मास्टर ट्रेनर्स से निरंतर संपर्क में रहने की सलाह दी।
जिला प्रशासन की सक्रिय भागीदारी
इस अवसर पर सोलन के उपायुक्त मनमोहन शर्मा ने भी जनगणना की महत्ता और इसकी विविधता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे ये आंकड़े भविष्य की नीतियों और कल्याणकारी कार्यक्रमों के निर्माण में सहायक सिद्ध होते हैं।
समापन समारोह के दौरान जिला राजस्व अधिकारी नीरजा शर्मा, संयुक्त निदेशक आशीष चौहान, जिला नोडल अधिकारी प्रसून कुमार वर्मा, जनगणना प्रभारी कोमल गर्ग व प्रियंका सहित 38 फील्ड ट्रेनर उपस्थित रहे।
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