Big opportunity for self-employment in Himachal

हिमाचल में स्वरोजगार का बड़ा मौका: ग्रामीण रूटों पर चलेंगी 390 बसें, युवाओं को मिलेगी 30% सब्सिडी

Shimla

शिमला: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने और प्रदेश के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार की महत्वाकांक्षी ‘राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना’ के तहत परिवहन विभाग ने प्रदेश के विभिन्न ग्रामीण रूटों पर 390 नए बस परमिट जारी करने का निर्णय लिया है। इस योजना की सबसे खास बात यह है कि बस खरीदने वाले युवाओं को सरकार की ओर से सीधे 30 प्रतिशत की वित्तीय सहायता (सब्सिडी) प्रदान की जाएगी।

परिवहन विभाग ने जारी की अधिसूचना

परिवहन विभाग ने इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है और आवेदन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। प्रदेश के जो युवा परिवहन क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं, वे विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 8 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है। इस योजना के माध्यम से जहां एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में बस सेवाओं की कमी दूर होगी, वहीं दूसरी ओर सैकड़ों युवाओं को घर द्वार पर रोजगार के अवसर मिलेंगे।

30% सब्सिडी और बसों की क्षमता

योजना के तहत चयनित आवेदकों को 18 से 42 सीटर बसें खरीदने की अनुमति होगी। सरकार बस की ‘ऑन-रोड’ कीमत पर अधिकतम 30 प्रतिशत तक का अनुदान देगी। यह सब्सिडी वाहन की खरीद और रूट परमिट जारी होने के बाद सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी। इससे युवाओं पर कर्ज का बोझ कम होगा और वे आसानी से अपना व्यवसाय शुरू कर सकेंगे।

जिलावार रूटों का विवरण: कांगड़ा और मंडी को सबसे ज्यादा परमिट

परिवहन विभाग ने प्रदेश के सभी 12 जिलों के लिए रूटों का आवंटन किया है। इसमें सबसे अधिक प्राथमिकता उन क्षेत्रों को दी गई है जहाँ वर्तमान में परिवहन की सुविधा कम है।

  • कांगड़ा: 101 रूट (सर्वाधिक)
  • मंडी: 95 रूट
  • शिमला: 68 रूट
  • कुल्लू: 20 रूट
  • बिलासपुर: 19 रूट
  • हमीरपुर: 18 रूट
  • नाहन (सिरमौर): 15 रूट
  • रामपुर: 14 रूट
  • ऊना: 13 रूट
  • चम्बा: 11 रूट
  • बद्दी-नालागढ़: 9 रूट
  • सोलन: 7 रूट
पात्रता और कड़े नियम (SOP)

सरकार ने इस योजना का लाभ सही और जरूरतमंद युवाओं तक पहुँचाने के लिए एक विस्तृत Standard Operating Procedure (SOP) जारी की है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  1. हिमाचली पहचान: आवेदक का बोनाफाइड हिमाचली होना अनिवार्य है।
  2. बेरोजगारी की शर्त: आवेदन के समय व्यक्ति पूरी तरह बेरोजगार होना चाहिए। किसी भी सरकारी, अर्द्धसरकारी या पीएसयू (PSU) में कार्यरत व्यक्ति इसके पात्र नहीं होंगे।
  3. एक परिवार, एक लाभ: परिवारवाद को रोकने के लिए नियम बनाया गया है कि एक परिवार से केवल एक ही सदस्य इस योजना का लाभ ले सकेगा।
  4. स्थानीयता को वरीयता: रूट आवंटन में सबसे पहले उस उपमंडल (Sub-Division) के निवासी को प्राथमिकता दी जाएगी जहाँ से बस रूट शुरू होता है।
चयन प्रक्रिया: पारदर्शिता के लिए लॉटरी सिस्टम

आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों (RTOs) द्वारा दस्तावेजों की जांच की जाएगी। यदि किसी एक रूट के लिए पात्र आवेदकों की संख्या उपलब्ध परमिट से अधिक होती है, तो चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए ‘लॉटरी’ (Draw of Lots) का सहारा लिया जाएगा। अंतिम परमिट आरटीओ द्वारा जारी किए जाएंगे और इन पर राज्य की सामान्य परिवहन नीतियां लागू होंगी।

परमिट ट्रांसफर पर प्रतिबंध और निगरानी

योजना के दुरुपयोग को रोकने के लिए विभाग ने सख्त प्रावधान किए हैं। आबंटित परमिट गैर-हस्तांतरणीय (Non-transferable) होंगे, यानी लाभार्थी इसे किसी दूसरे व्यक्ति को बेच या ट्रांसफर नहीं कर सकेगा। लाभार्थी को रूट पर बस का नियमित संचालन करना होगा। यदि कोई नियमों का उल्लंघन करता है या वाहन का दुरुपयोग पाया जाता है, तो विभाग न केवल परमिट रद्द करेगा, बल्कि दी गई सब्सिडी की वसूली भी की जाएगी।

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