शिमला | हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव करते हुए प्रारंभिक कक्षाओं (Pre-Primary to Class 1) में प्रवेश के लिए नई आयु सीमा और कट-ऑफ डेट लागू कर दी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रावधानों के तहत शिक्षा विभाग ने इस संबंध में संशोधित अधिसूचना जारी कर दी है।
30 सितंबर होगी नई ‘कट-ऑफ’ डेट
नई अधिसूचना के अनुसार, अब हिमाचल प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए 30 सितंबर को आधार तिथि (Cut-off Date) माना जाएगा। इसका अर्थ यह है कि जिस शैक्षणिक सत्र में बच्चा प्रवेश ले रहा है, उस वर्ष की 30 सितंबर तक बच्चे की निर्धारित आयु पूरी होनी अनिवार्य है।
कक्षावार आयु का नया गणित
सरकार ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के मानसिक और शैक्षणिक विकास को ध्यान में रखते हुए आयु सीमा तय की गई है। नई व्यवस्था के तहत नियम इस प्रकार हैं:
- बालवाटिका-1 (Nursery): 30 सितंबर तक 3 वर्ष की आयु पूरी होनी चाहिए।
- बालवाटिका-2 (LKG): 30 सितंबर तक 4 वर्ष की आयु पूरी होनी चाहिए।
- बालवाटिका-3 (UKG): 30 सितंबर तक 5 वर्ष की आयु पूरी होनी चाहिए।
- कक्षा-1 (1st Class): 30 सितंबर तक 6 वर्ष की आयु पूरी होनी चाहिए।
क्यों किया गया यह बदलाव?
शिक्षा विभाग के अनुसार, इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य प्रवेश प्रक्रिया में एकरूपता (Uniformity) लाना है। इससे पहले अलग-अलग स्कूलों में आयु सीमा को लेकर अभिभावकों के बीच भ्रम की स्थिति बनी रहती थी। यह निर्णय शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 और हिमाचल प्रदेश आरटीई नियम-2025 के तहत लिया गया है।
प्राइवेट स्कूलों को सख्त निर्देश
शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी उप-निदेशकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे निजी और सरकारी दोनों प्रकार के स्कूलों में इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी होने पर स्कूलों के खिलाफ कार्यवाही की जा सकती है।
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