सोलन और लाहौल-स्पीति के कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान

Himachal

नौणी / लुधियाना।
डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (यूएचएफ), नौणी द्वारा संचालित सोलन और लाहौल-स्पीति के कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के वैज्ञानिकों ने उल्लेखनीय कार्य के लिए पुरस्कार हासिल किए हैं। यह सम्मान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर–अटारी), जोन-1, लुधियाना के स्थापना दिवस समारोह के दौरान प्रदान किए गए।

केवीके लाहौल एवं स्पीति-II, ताबो के प्रमुख डॉ. आर.एस. सिपहिया को प्रभावी नेतृत्व, फ्रंटलाइन विस्तार कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन तथा कृषि अनुसंधान और ज्ञान प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए अपनाई गई अभिनव रणनीतियों के लिए परफॉर्मेंस एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

डॉ. सिपहिया ने शीत मरुस्थलीय और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील स्पीति क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ सेब और मटर जैसी प्रमुख फसलों के विपणन को मजबूत किया। उनके नेतृत्व में केवीके के बगीचों में स्पीति सेब की उत्कृष्ट गुणवत्ता का प्रदर्शन हुआ, जिसके चलते दो बार लगभग 40 लाख रुपये की नीलामी संभव हुई। प्राकृतिक विधियों से तैयार सेब पौधों की 9 लाख रुपये में नीलामी हुई, जिन्हें राज्य सरकार से सितारा प्रमाणन भी प्राप्त हुआ।

इसके अतिरिक्त, किसानों के हित में केवीके में फूड प्रोसेसिंग प्रयोगशाला को क्रियाशील बनाया गया, जिससे अधिशेष और विपणन योग्य न होने वाले फलों का मूल्य संवर्धन संभव हो सका। एफएसएसएआई लाइसेंस मिलने के बाद यह इकाई राजस्व अर्जित कर रही है और इसके शीघ्र आत्मनिर्भर बनने की संभावना है। स्पीति घाटी में किए गए ऑन-फार्म परीक्षणों और फ्रंट लाइन प्रदर्शनों के आधार पर विश्वविद्यालय की पैकेज ऑफ प्रैक्टिस में भी नई तकनीकों को शामिल किया गया है।

वहीं, केवीके सोलन (कंडाघाट) की टीम—डॉ. अनुराग शर्मा, डॉ. मीरा देवी और डॉ. आरती शुक्ला—को सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति पुरस्कार प्रदान किया गया। यह पुरस्कार उच्च मूल्य फसल उत्पादन, प्राकृतिक एवं जैविक खेती तथा विविधीकरण मॉडल के अंतर्गत आय सृजन विषय पर प्रस्तुत पोस्टर के लिए दिया गया। पोस्टर में गांव धारों की धार के कृषि उद्यमी करन सिंह की सफलता गाथा को दर्शाया गया, जिसमें उच्च मूल्य नर्सरी, उच्च सघनता सेब बागवानी, ब्लूबेरी और कार्नेशन उत्पादन जैसे नवाचारों को प्रस्तुत किया गया। जोन-1 के 72 केवीके से प्राप्त प्रविष्टियों में से इस पोस्टर का चयन किया गया।

ये पुरस्कार मुख्य अतिथि प्रो. राजेश्वर एस. चंदेल, कुलपति, यूएचएफ नौणी; डॉ. परविंदर श्योराण, निदेशक, आईसीएआर–अटारी, जोन-1; तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में प्रदान किए गए।

इस अवसर पर प्रो. चंदेल ने कहा कि ये उपलब्धियां विश्वविद्यालय और केवीके द्वारा किसानों के हित में किए जा रहे प्रभावी और नवोन्मेषी कार्यों को दर्शाती हैं। निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. इंदर देव सहित विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *