शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों के साथ शिक्षा सुधारों पर चर्चा करते हुए।

हिमाचल के कॉलेजों में बड़ा बदलाव: डिग्री के साथ मिलेगी नौकरी का अनुभव और स्टाइपेंड, शिक्षा मंत्री का बड़ा ऐलान

Himachal

शिमला (कमलेश) 03 जून, 2026। हिमाचल प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में जल्द ही कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने मंगलवार को शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में महाविद्यालयों में अप्रेंटिसशिप समाहित डिग्री कार्यक्रम और नए कौशल आधारित स्नातक पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लगातार सुधार लागू कर रही है। उन्होंने बताया कि स्नातक डिग्री पूरी कर चुके विद्यार्थियों के लिए अप्रेंटिसशिप आधारित कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, जिसके तहत छात्रों को विभिन्न उद्योगों में काम करने का अवसर मिलेगा और साथ ही स्टाइपेंड भी प्रदान किया जाएगा। इससे युवाओं को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक अनुभव और बेहतर रोजगार के अवसर मिलेंगे।

उन्होंने कहा कि कॉलेजों में विदेशी भाषाओं के पाठ्यक्रम शुरू करने की भी योजना है, जिससे विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। इसके अलावा कौशल आधारित बी.वोक. (B.Voc.) कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए सरकार चार नए स्किल कोर्स शुरू करने की तैयारी कर रही है।

बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री ने बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों की विस्तृत समीक्षा के निर्देश देते हुए कहा कि लगातार खराब प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने बायोमैट्रिक उपस्थिति को अनिवार्य बनाने और जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया।

रोहित ठाकुर ने बताया कि विभिन्न श्रेणियों के 1,131 एसएमसी शिक्षकों की नियुक्तियां एलडीआर के माध्यम से की जा चुकी हैं, जबकि 714 पीजीटी और 102 डीपीई पदों की भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। उन्होंने राज्य चयन आयोग और लोक सेवा आयोग को भेजे गए रिक्त पदों को शीघ्र भरने के निर्देश भी दिए।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने एसएमसी शिक्षकों, मिड-डे मील कर्मियों, जल वाहकों, कंप्यूटर शिक्षकों और बहुउद्देशीय कर्मियों के मानदेय में 500 रुपये प्रतिमाह की वृद्धि की है। साथ ही विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा के तहत बागवानी विषय को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

विद्यार्थियों को टैबलेट वितरण योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया, ताकि छात्र अपनी पसंद और आवश्यकता के अनुसार उपकरण खरीद सकें।

बैठक में यह भी बताया गया कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र में प्रदेश के 148 सरकारी विद्यालयों को सीबीएसई संबद्धता मिल चुकी है। सरकार भविष्य में और अधिक स्कूलों को सीबीएसई पाठ्यक्रम से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रही है।

शिक्षा मंत्री ने डॉ. वाईएस परमार विद्यार्थी ऋण योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि इस योजना के तहत विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए मात्र एक प्रतिशत ब्याज दर पर 20 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने योजना की प्रक्रिया को और सरल बनाने के निर्देश दिए।

रोहित ठाकुर ने शिक्षा विभाग की उपलब्धियों की सराहना करते हुए बताया कि परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) 2.0 में हिमाचल प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर छठा और राज्यों में तीसरा स्थान हासिल किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि शिक्षा विभाग भविष्य में भी उत्कृष्ट कार्य कर प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाए रखेगा।


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