शिमला (अक्षय) 24 मई, 2026। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई के समय विद्यार्थियों और शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक आयोजनों में भेजने पर सख्ती की जाएगी। शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी उपनिदेशकों और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों के प्रधानाचार्यों को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि बिना पूर्व अनुमति किसी भी छात्र या शिक्षक को स्वागत समारोह, सार्वजनिक कार्यक्रम, मंच सजावट, भीड़ जुटाने या अन्य गैर-शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल नहीं किया जाएगा।
शिक्षा विभाग ने यह कदम सरकारी स्कूलों में 240 शैक्षणिक दिवस सुनिश्चित करने और शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया है। विभाग का मानना है कि लगातार आयोजित होने वाले सरकारी समारोहों, सार्वजनिक कार्यक्रमों और अन्य गैर-शैक्षणिक गतिविधियों के कारण नियमित कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई, सीखने की क्षमता और परीक्षा परिणामों पर पड़ रहा है।
जारी निर्देशों के अनुसार अब स्कूलों से बाहर विद्यार्थियों की भागीदारी केवल उन्हीं गतिविधियों तक सीमित रहेगी, जिनका सीधा संबंध शिक्षा, खेल, विज्ञान, संस्कृति या कौशल विकास से होगा। ऐसे आयोजनों के लिए भी पहले विभागीय अनुमति लेना अनिवार्य रहेगा और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।
शिक्षा निदेशालय ने विश्व पर्यावरण दिवस, अर्थ डे तथा अन्य राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय दिवसों के आयोजन को लेकर भी नई गाइडलाइन जारी की है। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि ऐसे कार्यक्रमों को सुबह की प्रार्थना सभा, जागरूकता संदेश या “बैग-फ्री डे” जैसी सीमित गतिविधियों तक रखा जाए, ताकि पूरे दिन की शैक्षणिक पढ़ाई प्रभावित न हो।
निदेशालय ने अपने आदेशों में यह भी दोहराया है कि वार्षिक परीक्षाओं में बैठने के लिए विद्यार्थियों की 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है। यदि कोई छात्र बिना विभागीय अनुमति के किसी गैर-शैक्षणिक कार्यक्रम में भाग लेने के कारण स्कूल से अनुपस्थित रहता है, तो उस दिन को अनुपस्थिति माना जाएगा।
विभाग ने माना है कि कई मामलों में विद्यार्थियों को सार्वजनिक स्वागत कार्यक्रमों, भीड़ बढ़ाने, सांस्कृतिक मंचों की सजावट और अन्य गैर-शैक्षणिक आयोजनों में शामिल किया जाता रहा है, जिससे पढ़ाई बाधित होती है। अब ऐसी गतिविधियों को पूरी तरह हतोत्साहित किया जाएगा और स्कूलों को अकादमिक कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षा विभाग के इस फैसले को विद्यार्थियों की पढ़ाई और स्कूलों में अनुशासन के लिहाज से एक बड़ा कदम माना जा रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बेहतर होगा, कक्षाओं में नियमितता बढ़ेगी और विद्यार्थियों का अधिक समय गुणवत्तापूर्ण शिक्षण में लगेगा।
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