हिमालयन डॉन संवाददाता, शिमला: हिमाचल प्रदेश में कम विद्यार्थियों वाले 100 और सरकारी स्कूलों पर बंदी की तलवार लटक गई है। शिक्षा विभाग ने ऐसे स्कूलों की सूची तैयार कर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को भेज दी है, जहां विद्यार्थियों की संख्या बेहद कम या शून्य है। सरकार अब इन स्कूलों को बंद करने या नजदीकी स्कूलों में मर्ज करने पर अंतिम फैसला लेने जा रही है।
शिक्षा मंत्री Rohit Thakur ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रदेश में करीब 100 ऐसे सरकारी स्कूल हैं, जहां छात्र संख्या न के बराबर है। कुछ स्कूलों में तो एक भी छात्र नामांकित नहीं है, जबकि कई स्कूलों में सिर्फ 5 या उससे कम विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। ऐसे संस्थानों को बंद करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास भेजा गया है।
सरकार के तय मानकों के अनुसार जिन स्कूलों में 5 से कम विद्यार्थी हैं, उन्हें नजदीकी स्कूलों के साथ मर्ज किया जा सकता है। हालांकि दूरदराज क्षेत्रों के कुछ स्कूलों को लेकर सरकार अभी भी मंथन कर रही है, क्योंकि वहां दूसरे स्कूल की दूरी काफी अधिक है।
बताया जा रहा है कि मंत्रिमंडल पहले ही स्कूल बंद करने और मर्ज करने के फैसले का अधिकार मुख्यमंत्री को दे चुका है। ऐसे में अब कैबिनेट की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी। मुख्यमंत्री कार्यालय से हरी झंडी मिलते ही शिक्षा विभाग आदेश जारी कर सकता है।
शिक्षा मंत्री ने संकेत दिए कि कुछ स्कूलों का दर्जा भी घटाया जा सकता है और इसका प्रस्ताव भी सरकार के विचाराधीन है। वहीं उन्होंने जमा-2 परीक्षा परिणामों पर संतोष जताते हुए कहा कि इस बार सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने टॉप कर शिक्षा क्षेत्र में सुधार की तस्वीर पेश की है।
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