HRTC पेंशन को लेकर जय राम ठाकुर का बयान

28 तारीख तक भी नहीं आई HRTC पेंशन! जय राम ठाकुर का सुक्खू सरकार पर हमला—KNH शिफ्टिंग और रोबोटिक सर्जरी पर उठाए बड़े सवाल

Himachal

शिमला | हिमालयन डॉन संवाददाता, हिमाचल प्रदेश की सियासत में एक बार फिर पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी फैसलों को लेकर घमासान तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने 28 अप्रैल तक भी एचआरटीसी पेंशन न मिलने पर सुक्खू सरकार को घेरते हुए तीखा हमला बोला है।

जय राम ठाकुर ने कहा कि महीने के खत्म होने में सिर्फ दो दिन बाकी हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (HRTC) के पेंशनरों को अब तक पेंशन नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि पेंशनरों को बार-बार सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, जबकि तय तारीख 15 होने के बावजूद भुगतान समय पर नहीं हो रहा।

उन्होंने सवाल उठाया कि बिना पेंशन के पेंशनर अपने परिवार का खर्च कैसे चला रहे हैं, खासकर जब शादी का सीजन चल रहा है और लोग पूरी तरह पेंशन पर निर्भर हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले तीन साल से पेंशनरों के मेडिकल बिलों का भुगतान भी लंबित है, जिससे लोग कर्ज लेकर या अपनी बचत खर्च कर इलाज कराने को मजबूर हैं।

KNH शिफ्टिंग पर भी घमासान
जय राम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि कमला नेहरू हॉस्पिटल (KNH) से गायनी विभाग को IGMC शिफ्ट करना एक “तुगलकी फैसला” है।
उन्होंने दावा किया कि यह निर्णय न तो डॉक्टरों, न प्रशासन और न ही मरीजों की मांग पर लिया गया, बल्कि राजनीतिक जिद में किया गया है। इस फैसले से रोजाना सैकड़ों महिलाओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है और उन्हें KNH व IGMC के बीच भटकना पड़ रहा है।

रोबोटिक सर्जरी पर बड़ा सवाल
जय राम ठाकुर ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि रोबोटिक सर्जरी मशीन खरीदने को सही ठहराने के लिए ही विभाग को शिफ्ट किया गया, लेकिन डेढ़ महीने बाद भी एक भी रोबोटिक सर्जरी नहीं हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले जो सर्जरी मुफ्त होती थी, अब रोबोटिक सर्जरी के नाम पर ₹30,000 तक शुल्क लिया जा रहा है। साथ ही, महिलाओं की मेजर सर्जरी पर अतिरिक्त ₹4700 का बोझ डाला गया है, जिसमें बुनियादी सुविधाओं के भी पैसे वसूले जा रहे हैं।

सरकार पर गंभीर आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अस्पतालों में दवाइयों की कमी है और छोटी जांचों के लिए भी मरीजों को निजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल किया कि बिना तैयारी और औचित्य के ऐसे फैसले लेकर सरकार आखिर क्या हासिल करना चाहती है।

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