हिमालयन डॉन ब्यूरो, शिमला | हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के हक में एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। अदालत की खंडपीठ ने “हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी (भर्ती और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 2024” के उन विवादित प्रावधानों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जो कर्मचारियों के अधिकारों पर अंकुश लगाते थे।
संवैधानिक अधिकारों की जीत
माननीय न्यायाधीशों ने इस मामले पर 5 जनवरी 2026 को सुनवाई पूरी करने के बाद आज अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने उन प्रावधानों को असंवैधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया, जो वर्ष 2003 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के हितों और उनकी वरिष्ठता को सीमित करने का प्रयास कर रहे थे।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी थी कि राज्य सरकार का यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का स्पष्ट उल्लंघन है। इस कानून के जरिए सरकार ने पूर्व में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट द्वारा दिए गए उन आदेशों को निष्प्रभावी करने की कोशिश की थी, जिनमें अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) सेवा को वरिष्ठता और वित्तीय लाभ के लिए गणना में लेने की बात कही गई थी।
डॉ. मामराज पुंडीर ने फैसले का किया स्वागत
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (हिमाचल प्रदेश) के पूर्व प्रान्त महामंत्री डॉ. मामराज पुंडीर ने इस फैसले को न्याय और समानता की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा:
”यह निर्णय प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के सम्मान और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करता है। सरकार को अब यह समझ लेना चाहिए कि कर्मचारियों के साथ किसी भी स्तर पर भेदभाव स्वीकार्य नहीं होगा।”
सरकार को सकारात्मक नीति की सलाह
डॉ. पुंडीर ने कहा कि सरकार को भविष्य में ऐसे कठोर कानून बनाने से बचना चाहिए जो कर्मचारियों के हितों के खिलाफ हों। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस फैसले के बाद प्रदेश में एक सकारात्मक और न्यायपूर्ण कार्य संस्कृति विकसित होगी। उन्होंने इस जीत पर प्रदेश के समस्त कर्मचारी वर्ग को बधाई दी है और इसे उनके संघर्ष का सुखद परिणाम बताया है।
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