हिमालयन डॉन संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (HPNLU), शिमला में कानूनी पेशे में उत्कृष्टता हासिल करने पर एक महत्वपूर्ण अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रीती सक्सेना के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस जे. आर. मिधा ने बतौर मुख्य वक्ता छात्रों को संबोधित किया।
प्लेसमेंट सहायता प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित इस व्याख्यान में अंतिम वर्ष के छात्र, एलएल.एम. शोधार्थी और विश्वविद्यालय के शिक्षक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में जस्टिस मिधा ने कहा कि कानूनी पेशे में सफलता के लिए तार्किक तर्कशक्ति, विचारों की स्पष्टता, प्रभावी वकालत और भाषा पर मजबूत पकड़ बेहद आवश्यक है।
उन्होंने मुकदमेबाजी, न्यायपालिका और कॉर्पोरेट प्रैक्टिस जैसे विभिन्न क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए जरूरी कौशलों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही उन्होंने निरंतर सीखने की प्रवृत्ति, सटीक कानूनी तर्क और मनाने की कला को सफलता की कुंजी बताया। अपने न्यायिक अनुभव साझा करते हुए उन्होंने अदालत की कार्यप्रणाली और अनुशासित कार्यशैली के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका जस्टिस मिधा ने विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने कानूनी पेशे की चुनौतियों और अपेक्षाओं को लेकर व्यावहारिक दृष्टिकोण भी प्रस्तुत किया।
इस कार्यक्रम का संचालन प्लेसमेंट सहायता प्रकोष्ठ की अध्यक्षा डॉ. नवदित्या तंवर के मार्गदर्शन में किया गया। व्याख्यान ने छात्रों को कानूनी करियर के प्रति नई दिशा और प्रेरणा प्रदान की।
यह भी पढ़ें:- हिमाचल प्रदेश: 1133 एसएमसी शिक्षकों को बड़ी राहत, शिक्षा विभाग में विलय के बाद अब ट्रांसफर के दायरे में आए
हिमाचल प्रदेश की सभी ताज़ा और सटीक खबरों के लिए जुड़े रहें हिमालयन डॉन के साथ।
WhatsApp चैनल:
Join WhatsApp Channel
Telegram चैनल:
Join Telegram Channel
Facebook पेज:
Join Facebook Page
