शिमला (हिमालयन डॉन): हिमाचल प्रदेश में स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के तहत नियुक्त शिक्षकों के मानदेय और वित्तीय प्रबंधन को लेकर स्कूल शिक्षा निदेशालय ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य न केवल बजट के पारदर्शी उपयोग को सुनिश्चित करना है, बल्कि भुगतान प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकना भी है।
निदेशालय द्वारा जारी आदेशों के अनुसार एसएमसी शिक्षकों के लिए संबंधित मद (हेड ऑफ अकाउंट) में टोकन बजट उपलब्ध करवाया जा चुका है। इसके तहत अब सभी जिलों के उपनिदेशकों (उच्च शिक्षा) को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे इस प्रक्रिया की निगरानी करते हुए सुनिश्चित करें कि बजट का उपयोग निर्धारित नियमों के अनुरूप ही किया जाए।
ई-सैलरी पोर्टल के माध्यम से होगा भुगतान
शिक्षा विभाग ने उपनिदेशकों को यह भी निर्देशित किया है कि वे अपने अधीन कार्यरत सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (डीडीओ) को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करें। सभी डीडीओ को ई-सैलरी पोर्टल के माध्यम से ही ऑनलाइन बिल तैयार करने होंगे। इसके साथ ही, सरकार द्वारा समय-समय पर जारी अधिसूचनाओं और वित्तीय नियमों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य किया गया है।
विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि एसएमसी शिक्षकों को दी जाने वाली ग्रांट-इन-एड राशि का भुगतान निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही किया जाए, ताकि भुगतान में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।
अनियमितता पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान
निदेशालय ने अपने निर्देशों में साफ चेतावनी दी है कि यदि किसी भी डीडीओ द्वारा अधिक भुगतान किया जाता है या ग्रांट-इन-एड का वितरण नियमों के विपरीत पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह कदम वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की पहल
शिक्षा विभाग के इस कदम को राज्य में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एसएमसी के तहत नियुक्त शिक्षक ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके मानदेय और बजट प्रबंधन की पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
प्रशासनिक निगरानी होगी और कड़ी
सूत्रों के अनुसार, विभाग अब इस पूरी प्रक्रिया पर नियमित निगरानी भी रखेगा, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। उपनिदेशकों को समय-समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं, जिससे पूरी प्रणाली अधिक जवाबदेह बने।
कुल मिलाकर, स्कूल शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी ये दिशा-निर्देश एसएमसी शिक्षकों के लिए वित्तीय प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
यह भी पढ़ें:- नौहराधार में 10 अप्रैल को सेब बागवानी पर विशेष ‘नॉलेज सेमिनार’ का आयोजन, विशेषज्ञ देंगे आधुनिक गुर
हिमाचल प्रदेश की सभी ताज़ा और सटीक खबरों के लिए जुड़े रहें हिमालयन डॉन के साथ।
WhatsApp चैनल:
Join WhatsApp Channel
Telegram चैनल:
Join Telegram Channel
Facebook पेज:
Join Facebook Page
