शिमला | हिमाचल प्रदेश में आज यानी 1 अप्रैल, 2026 से नए वित्त वर्ष का आगाज हो गया है। इसके साथ ही आम आदमी की जिंदगी, कमाई और खर्च से जुड़े कई बड़े बदलाव लागू हो गए हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार के बजट फैसलों का सीधा असर अब जमीन पर दिखने लगेगा। कहीं जनता को राशन और बिजली में राहत मिली है, तो कहीं एंट्री टैक्स और शराब के दामों में बढ़ोतरी का बोझ भी झेलना पड़ेगा।
यहाँ पढ़ें, नए वित्त वर्ष के मुख्य बदलाव:
1. राहत: बिजली सस्ती, राशन में बढ़ोतरी
- बिजली दरें: उपभोक्ताओं को राहत देते हुए बिजली की दरों में 1 पैसे प्रति यूनिट की कमी की गई है।
- सस्ता राशन: डिपुओं में मिलने वाले राशन में इजाफा किया गया है। अब एपीएल (APL) परिवारों को प्रति कार्ड 11 किलो के बजाय 12 किलो आटा मिलेगा।
2. मानदेय में वृद्धि: कर्मचारियों और दिहाड़ीदारों की ‘चांदी’
सरकार ने विभिन्न वर्गों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की है:
- दिहाड़ीदार: अब प्रतिदिन की दिहाड़ी बढ़कर ₹750 हो गई है।
- मानदेय: आंगनबाड़ी वर्कर्स, आशा वर्कर्स और चौकीदारों के वेतन में वृद्धि लागू हो गई है।
- NHM कर्मचारी: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत हजारों कर्मचारियों के वेतन में भी बढ़ोतरी की गई है।
3. ग्रामीण अर्थव्यवस्था: पशुपालकों को बड़ा तोहफा
दूध के खरीद मूल्यों में ऐतिहासिक वृद्धि से ग्रामीण आय बढ़ेगी:
- गाय का दूध: ₹51 से बढ़ाकर ₹61 प्रति लीटर।
- भैंस का दूध: ₹61 से बढ़ाकर ₹71 प्रति लीटर।
4. महंगाई का झटका: एंट्री टैक्स और शराब
- एंट्री टैक्स: प्रदेश की सीमाओं पर लगने वाला प्रवेश शुल्क (Entry Tax) बढ़ गया है। बाहर से आने वाले मालवाहक वाहनों पर ज्यादा टैक्स लगने से बाजार में रोजमर्रा की चीजें महंगी होने के आसार हैं।
- शराब: नई आबकारी नीति के तहत शराब की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। सरकार का लक्ष्य इससे ₹2900 करोड़ का राजस्व जुटाना है।
5. सामाजिक सुरक्षा और नियुक्तियां
- बेटियों को सहारा: बीपीएल परिवार की बेटियों की शादी के लिए मिलने वाली सहायता राशि अब ₹51,000 होगी।
- महिला सशक्तिकरण: ₹80 लाख से ₹1 करोड़ तक की संपत्ति महिला के नाम होने पर स्टाम्प ड्यूटी मात्र 4 प्रतिशत रहेगी।
- रोजगार: पुलिस कांस्टेबल और शिक्षकों के 1,050 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
6. आर्थिक अनुशासन: वीआईपी खर्च पर ‘कट’
प्रदेश के वित्तीय हालात को सुधारने के लिए सरकार ने कड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और उच्च अधिकारियों के वेतन का एक हिस्सा अगले छह माह के लिए स्थगित (Defer) रहेगा।
हिमालयन डॉन न्यूज़ विश्लेषण: नए वित्त वर्ष का यह गणित बताता है कि सरकार एक तरफ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर कर्ज के बोझ को कम करने के लिए कड़े वित्तीय फैसले भी ले रही है।
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