शिमला | हिमालयन डॉन, हिमाचल प्रदेश की वित्तीय सेहत को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। सोमवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा विधानसभा में पेश की गई वर्ष 2024-25 की विनियोग लेखा रिपोर्ट (Appropriation Accounts Report) बताती है कि प्रदेश सरकार ने वित्तीय प्रबंधन में गंभीर लापरवाही बरती है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने बिना किसी बजट प्रावधान के 438 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च कर डाली।
नियमों की धज्जियां: न बजट, न अनुपूरक स्वीकृति
कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि नौ विभिन्न विभागों में करोड़ों रुपये का अतिरिक्त खर्च किया गया, जिसके लिए न तो मुख्य बजट में कोई प्रावधान था और न ही बाद में विधानसभा से अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) के माध्यम से मंजूरी ली गई। नियमों के अनुसार, बिना विधायी स्वीकृति के एक रुपया भी खर्च करना गंभीर वित्तीय अनियमितता है।
किन विभागों में हुआ अत्यधिक खर्च?
रिपोर्ट में मुख्य रूप से निम्नलिखित विभागों में वित्तीय नियमों के उल्लंघन की बात कही गई है:
- लोक निर्माण विभाग (PWD)
- जल शक्ति विभाग
- शिक्षा और पशुपालन विभाग
- ग्रामीण एवं शहरी विकास
- कृषि एवं बागवानी विश्वविद्यालय
जलशक्ति विभाग: बिना सर्वे बनी योजनाएं, जनता प्यासी
कैग ने जलशक्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। 2019 से 2023 के बीच लघु सिंचाई योजनाओं की ऑडिट में पाया गया कि:
- कई योजनाएं बिना किसी प्रारंभिक सर्वे के बना दी गईं, जिसके कारण पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुँचा।
- ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया से बचने के लिए 48.25 करोड़ रुपये के कार्यों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दिया गया।
- राजस्व वसूली में भारी कमी: 9.79 करोड़ रुपये की संभावित आय के मुकाबले केवल 0.37 करोड़ रुपये ही वसूले जा सके।
कर्ज के जाल में हिमाचल: ₹1,03,331 करोड़ पहुंची देनदारी
प्रदेश की ऋण स्थिति अब खतरे के निशान को पार कर चुकी है। रिपोर्ट के आंकड़े डराने वाले हैं:
- कुल ऋण: अप्रैल 2024 में जो ऋण 92,365 करोड़ था, वह मार्च 2025 तक बढ़कर 1,03,331.91 करोड़ रुपये हो गया है।
- नया कर्ज: वित्तीय वर्ष 2024 में सरकार ने 26,622 करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया।
- ब्याज का बोझ: बाजार से लिए गए ऋणों पर सरकार 8.08% से 9.63% तक का भारी ब्याज चुका रही है।
कैग की सख्त टिप्पणी
कैग ने इसे ‘वित्तीय अनुशासनहीनता’ करार दिया है। बजट मैनुअल का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च 2025 में 13.51 करोड़ रुपये इधर-उधर (Re-appropriation) करके खर्च की व्यवस्था करना नियमों के खिलाफ है। कैग ने राज्य सरकार को अपनी बजट प्रक्रिया और वित्तीय प्रबंधन में तत्काल सुधार करने की चेतावनी दी है।
रिपोर्ट: प्रदेश पर बढ़ता कर्ज और बिना स्वीकृति के हो रहा खर्च आने वाले समय में हिमाचल की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
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