धर्मशाला | ब्यूरो रिपोर्ट, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (HPBOSE) ने प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक बड़े सुधार की तैयारी कर ली है। आगामी शैक्षणिक सत्र 2027-28 से 9वीं और 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों को नए और आधुनिक पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई करनी होगी। बोर्ड अब पूरी तरह से NCERT आधारित पाठ्यक्रम को लागू करने जा रहा है।
रट्टा प्रथा का होगा अंत, स्किल पर जोर
बोर्ड के इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित न रखकर उसे व्यावहारिक बनाना है। स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव डॉ. मेजर विशाल शर्मा ने जानकारी दी कि नए सिलेबस का खाका इस तरह तैयार किया जा रहा है जिससे ‘रट्टा प्रथा’ को खत्म किया जा सके। नया पाठ्यक्रम पूरी तरह से स्किल बेस्ड (कौशल आधारित) होगा, ताकि छात्रों में रटने के बजाय समझने की क्षमता विकसित हो।
क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत?
बोर्ड का मानना है कि वर्तमान सिलेबस और राष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम में अंतर होने के कारण प्रदेश के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) और उच्च शिक्षा में मुश्किलों का सामना करना पड़ता था।
- समानता: NCERT आधारित सिलेबस होने से हिमाचल के छात्र देश के अन्य छात्रों के साथ बराबरी की प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
- बोझ होगा कम: नए पाठ्यक्रम में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि छात्रों पर पढ़ाई का अनावश्यक बोझ न बढ़े।
- व्यावहारिक ज्ञान: विशेषज्ञों की मदद से ऐसा कंटेंट तैयार किया जा रहा है जो भविष्य की जरूरतों और रोजगार के अवसरों को ध्यान में रखे।
तैयारी शुरू: जल्द छपेंगी नई किताबें
हिमाचल शिक्षा बोर्ड इससे पहले चौथी से आठवीं कक्षा तक का सिलेबस बदल चुका है। अब माध्यमिक स्तर (9वीं-10वीं) के लिए नई किताबें छापने की प्रक्रिया और विशेषज्ञों के साथ चर्चा का दौर शुरू होने वाला है।
“अगले सत्र से 9वीं और 10वीं का सिलेबस बदला जा रहा है। हमारा लक्ष्य शिक्षा को केवल परीक्षा पास करने का माध्यम न बनाकर इसे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और कौशल विकास से जोड़ना है।” — डॉ. मेजर विशाल शर्मा, सचिव, एचपी शिक्षा बोर्ड
शिक्षा जगत से जुड़ी ऐसी ही तमाम बड़ी खबरों के लिए बने रहिए हिमालयन डॉन न्यूज़ के साथ।
यह भी पढ़ें:- नौणी विवि में मंथन: विलुप्त होते औषधीय पौधों को बचाने के लिए जुटे वैज्ञानिक, वन अधिकारी और किसान
