हिमाचल के डिपुओं में राशन लेते लोग और रिफाइंड तेल का पैकेट।

डिपुओं में अप्रैल से महंगा होगा रिफाइंड तेल, राशनकार्ड धारकों की जेब पर पड़ेगा ₹10 का अतिरिक्त बोझ

Himachal

धर्मशाला| हिमाचल प्रदेश के लाखों राशनकार्ड धारकों के लिए अप्रैल का महीना आर्थिक मोर्चे पर झटका देने वाला साबित होने जा रहा है। प्रदेश के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित सस्ते राशन के डिपुओं में मिलने वाले रिफाइंड तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है। इस निर्णय से विशेष रूप से जिला कांगड़ा सहित प्रदेश भर के लाखों उपभोक्ताओं को अब खाना पकाने के तेल के लिए अधिक कीमत चुकानी होगी। Himalayan Dawn की रिपोर्ट के अनुसार, बाजार की अस्थिरता और नई निविदा प्रक्रियाओं के बाद तेल की कीमतों में यह बदलाव देखने को मिल रहा है।

₹125 से बढ़कर ₹135 हुआ दाम

​ताजा जानकारी के अनुसार, वर्तमान में डिपुओं में रिफाइंड तेल का एक लीटर का पैकेट ₹125 में उपलब्ध करवाया जा रहा था, लेकिन अप्रैल 2026 से इसके लिए उपभोक्ताओं को ₹135 प्रति लीटर का भुगतान करना होगा। यानी सीधे तौर पर ₹10 प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जिला कांगड़ा के ही आंकड़ों पर नजर डालें तो यहाँ पंजीकृत लगभग 4,68,974 राशन कार्ड धारकों पर इस महंगाई की सीधी मार पड़ेगी। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग (DFS) ने स्पष्ट किया है कि नई दरें अप्रैल माह के कोटे से ही लागू कर दी जाएंगी।

गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर असर

​सरकार द्वारा डिपुओं के माध्यम से गेहूं, चावल, दालें, नमक, आटा और सरसों के तेल के साथ रिफाइंड तेल भी सब्सिडी वाली दरों पर प्रदान किया जाता है। गरीबी रेखा से नीचे (BPL) और अन्य प्राथमिकता वाले परिवारों (PHH) के लिए यह ₹10 की बढ़ोतरी उनके मासिक बजट को प्रभावित करेगी। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए भी, जो डिपुओं के राशन पर निर्भर हैं, यह अतिरिक्त वित्तीय बोझ चिंता का विषय है। गौरतलब है कि सरसों के तेल और रिफाइंड तेल की कीमतों में समय-समय पर निविदाओं (Tenders) के आधार पर बदलाव होता रहता है, और इस बार रिफाइंड तेल के टेंडर ऊंचे दामों पर छूटे हैं।

अधिकारियों का पक्ष

​इस महत्वपूर्ण बदलाव की पुष्टि करते हुए डीएफसी कांगड़ा, पुरुषोत्तम सिंह ने बताया कि रिफाइंड तेल की संशोधित कीमतें अप्रैल माह से वसूली जाएंगी। विभाग ने सभी डिपो संचालकों को निर्देश जारी किए हैं कि वे नई दरों के अनुसार ही स्टॉक का वितरण सुनिश्चित करें। विभाग का तर्क है कि बाहरी बाजारों में भी खाद्य तेलों की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिसका असर सरकारी सप्लाई पर भी पड़ा है।

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