शिमला। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज राज्य सचिवालय में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक प्रदेश के विकास और सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से ऐतिहासिक साबित हुई। इस बैठक में सरकार ने एक तरफ जहाँ स्वास्थ्य ढांचे को विश्वस्तरीय बनाने के लिए भारी-भरकम बजट को मंजूरी दी, वहीं दूसरी ओर युवाओं के लिए नौकरियों और समाज के वंचित वर्गों के लिए आर्थिक सहायता के द्वार खोल दिए हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘कायाकल्प’ की तैयारी
कैबिनेट का सबसे बड़ा फैसला स्वास्थ्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण को लेकर रहा। सरकार ने प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों, सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों और आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों के लिए 1,617.40 करोड़ रुपये की मेगा-परियोजना को स्वीकृति दी है।
इस निवेश का मुख्य उद्देश्य हिमाचल के मरीजों को बेहतर इलाज के लिए चंडीगढ़ या दिल्ली जैसे शहरों की ओर भागने से रोकना है। इसके तहत शिमला के कमला नेहरू अस्पताल, नूरपुर, ऊना और भोरंज जैसे अस्पतालों में अत्याधुनिक उपकरण खरीदे जाएंगे और इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारा जाएगा। इसके साथ ही, डॉ. वाई.एस. परमार मेडिकल कॉलेज नाहन में इम्यूनोहेमेटोलॉजी एवं ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग की स्थापना को भी मंजूरी दी गई है।
नौकरियों की बौछार: 1100 से अधिक पदों पर भर्ती
बेरोजगार युवाओं के लिए कैबिनेट ने खुशखबरी देते हुए विभिन्न विभागों में बंपर भर्तियों का रास्ता साफ किया है:
- शिक्षा विभाग: प्रस्तावित सीबीएसई (CBSE) स्कूलों के लिए संस्कृत, संगीत, शारीरिक शिक्षा और ड्राइंग शिक्षकों के कुल 600 पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। ये पद राज्य चयन आयोग के माध्यम से भरे जाएंगे।
- स्वास्थ्य विभाग: फार्मासिस्ट (40 पद), सहायक स्टाफ नर्स (150 पद), रेडियोग्राफर (30 पद) और फूड सेफ्टी ऑफिसर (10 पद) की भर्ती होगी।
- लोक निर्माण विभाग (PWD): भर्ती निदेशालय में कनिष्ठ अभियंता (Civil) के 190 और जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (IT) के 151 पदों को भरने की स्वीकृति मिली।
- अन्य विभाग: सैनिक कल्याण विभाग, राजस्व विभाग और हिमाचल हाई कोर्ट रजिस्ट्री में भी रिक्त पदों को भरने का निर्णय लिया गया।
दिव्यांगों और महिलाओं को बड़ी सौगात
सुक्खू सरकार ने सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाते हुए दिव्यांग विवाह अनुदान में चार गुना बढ़ोतरी की है। अब 70 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को विवाह पर 50,000 रुपये के बजाय 2 लाख रुपये की आर्थिक मदद मिलेगी। वहीं, 40 से 70 प्रतिशत दिव्यांगता वालों को 25,000 रुपये दिए जाएंगे।
महिलाओं के हित में फैसला लेते हुए महिला होम गार्ड स्वयंसेवकों को अब नियमित कर्मचारियों की तर्ज पर 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलेगा। साथ ही, ‘इंदिरा गांधी मातृ शिशु संकल्प योजना’ के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने के लिए विशेष पूरक आहार उपलब्ध कराया जाएगा।
शिक्षा में ‘सुख-शिक्षा’ और डिजिटल क्रांति
‘इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना’ में संशोधन कर सरकार ने विधवाओं की बेटियों के लिए उच्च शिक्षा का रास्ता आसान कर दिया है। अब बेटियों को राज्य के बाहर भी व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की पढ़ाई के लिए वित्तीय सहायता मिलेगी। यदि हॉस्टल की सुविधा नहीं है, तो उन्हें 3,000 रुपये प्रति माह किराया सहायता दी जाएगी।
शिक्षा क्षेत्र में एक और बड़ा बदलाव करते हुए राज्य के 31 बालक और बालिका विद्यालयों का विलय कर उन्हें ‘सह-शिक्षा’ (Co-ed) स्कूलों में बदलने का निर्णय लिया गया है। साथ ही, 777 अतिरिक्त स्कूलों में डिजिटल क्लासरूम परियोजना शुरू की जाएगी। चंबा जिले में कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘डिस्टिल ग्लोबल स्किल्स एवं डिजिटल विश्वविद्यालय’ की स्थापना का फैसला भी लिया गया है।
बुनियादी ढांचा और खेल प्रोत्साहन
कैबिनेट ने लोक निर्माण विभाग के लिए ‘रोड ड्रेनेज नीति’ को मंजूरी दी है, जिससे मानसून के दौरान सड़कों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा। सड़कों के पैच वर्क और मरम्मत के लिए नई SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) भी लागू होगी।
खेलों के क्षेत्र में हिमाचल को आगे ले जाने के लिए बिलासपुर (लुहणू), शिमला (चौपाल, जुब्बल) और सिरमौर (शिलाई) में वॉलीबॉल, कबड्डी, बॉक्सिंग और हैंडबॉल के लिए नए खेल छात्रावास और सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
आगामी बजट सत्र और नई नीतियां
मंत्रिमंडल ने आगामी विधानसभा बजट सत्र के लिए राज्यपाल के अभिभाषण को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा, राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए टोल टैक्स बैरियर नीति 2026-27 और आबकारी नीति 2026-27 को भी हरी झंडी दी गई है।
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