सीडीएल कसौली में रैबीज वैक्सीन सैंपल फेल की जांच

कसौली में रैबीज वैक्सीन का सैंपल फेल, बाजार में नहीं उतरेगा बैच; स्वास्थ्य मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी गई

Solan

कसौली। 13 फरवरी 2026: पागल जानवर के काटने के बाद लगाई जाने वाली जीवनरक्षक रैबीज वैक्सीन का एक सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल हो गया है। सैंपल की जांच केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) कसौली में की गई, जहां कई चरणों की परीक्षण प्रक्रिया के दौरान यह निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरा। प्रयोगशाला की आधिकारिक वेबसाइट पर भी सैंपल फेल होने की पुष्टि दर्ज की गई है।

जानकारी के अनुसार, संबंधित सैंपल लॉट रिलीज बैच से कंपनी द्वारा जांच के लिए भेजा गया था। रिपोर्ट कंपनी और स्वास्थ्य मंत्रालय को भेज दी गई है। अब स्वास्थ्य अधिकारियों की उपस्थिति में उक्त बैच को नष्ट किया जाएगा। स्पष्ट किया गया है कि यह बैच बाजार में जारी नहीं किया गया था।

किस राज्य से आया सैंपल?
सीडीएल कसौली ने यह जानकारी साझा नहीं की है कि सैंपल किस राज्य से भेजा गया था। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक कंपनी की सप्लाई निजी और सरकारी—दोनों स्तरों पर होती रही है।

पहले भी फेल हो चुका है एंटी सीरम का सैंपल
इससे पहले सर्पदंश के उपचार में उपयोग होने वाले स्नेक वेनम एंटी सीरम का सैंपल भी जांच में फेल हुआ था। यह एंटी सीरम हाफकिन बायो फार्मा (महाराष्ट्र सरकार) द्वारा निर्मित था। जांच में इसमें मॉयश्चर (नमी) की मात्रा निर्धारित सीमा (3%) से अधिक पाई गई थी। वह सैंपल भी लॉट रिलीज बैच से जांच के लिए सीडीएल कसौली भेजा गया था।

क्या है रैबीज और रैबीज वैक्सीन?
रैबीज एक घातक वायरल संक्रमण है, जो आमतौर पर कुत्ता, बिल्ली, बंदर, चमगादड़ या अन्य संक्रमित जानवर के काटने/खरोंचने से फैलता है। समय पर टीकाकरण न होने पर यह मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर जानलेवा साबित हो सकता है।

रैबीज वैक्सीन शरीर में एंटीबॉडी विकसित कर वायरस को फैलने से रोकती है। भारत में तैयार और आयात होने वाली सभी वैक्सीन और एंटी सीरम की अनिवार्य जांच सीडीएल कसौली में की जाती है। बिना परीक्षण और अनुमोदन के किसी भी वैक्सीन का मानव उपयोग नहीं किया जाता।

क्यों अहम है यह मामला?

  • रैबीज 100% घातक माना जाता है, लेकिन समय पर टीकाकरण से पूरी तरह रोके जाने योग्य है।
  • गुणवत्ता जांच में सैंपल फेल होना यह दर्शाता है कि निगरानी तंत्र सक्रिय है।
  • फेल बैच को बाजार में जारी न करना सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि जानवर के काटने की स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करें और डॉक्टर की सलाह अनुसार टीकाकरण कराएं।

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