विकासनगर: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर मंगलवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा पेश आया है। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के नेरवा डिपो की एक बस उत्तराखंड के विकासनगर के समीप क्वाणु नामक स्थान पर अनियंत्रित होकर गहरी खाई से होते हुए सीधे नदी में जा गिरी। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त बस में चालक-परिचालक समेत लगभग 31 से 34 यात्री सवार थे।
हादसे का घटनाक्रम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एचआरटीसी की बस संख्या HP 66A 2588 मंगलवार सुबह चौपाल से पांवटा साहिब के लिए रवाना हुई थी। सुबह करीब 9:30 बजे जब बस उत्तराखंड के क्वाणु क्षेत्र में पहुंची, तो एक संकरे मोड़ पर विपरीत दिशा से आ रहे वाहन को रास्ता (पास) देते समय चालक ने बस पर से नियंत्रण खो दिया। बस सड़क से नीचे उतरकर पहले खाई में लुढ़की और फिर सीधे नदी के किनारे जा रुकी।
परिचालक ने दिखाई सूझबूझ
हादसे के तुरंत बाद बस के परिचालक जगदीश चंद ने हिम्मत दिखाते हुए पुलिस और प्रशासन को फोन के जरिए घटना की जानकारी दी। चालक दिनेश शर्मा और परिचालक दोनों सुरक्षित बताए जा रहे हैं। परिचालक की त्वरित सूचना के बाद स्थानीय पुलिस और SDRF (State Disaster Response Force) की टीमें मौके के लिए रवाना हो गईं।
रेस्क्यू ऑपरेशन और घायलों की स्थिति
घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। खाई की गहराई और नदी का क्षेत्र होने के कारण रेस्क्यू टीमों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
- प्राथमिक उपचार: स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस के आने से पहले ही बचाव कार्य शुरू कर दिया था।
- अस्पताल: घायलों को एम्बुलेंस के माध्यम से नजदीकी अस्पतालों, विकासनगर और चकराता ले जाया जा रहा है।
- हताहतों की स्थिति: अभी तक किसी के हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि प्रशासन ने नहीं की है, लेकिन कई यात्रियों को गंभीर चोटें आने की आशंका जताई जा रही है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड, दोनों राज्यों के जिला प्रशासन आपस में समन्वय बनाए हुए हैं। हिमाचल परिवहन विभाग ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। नेरवा डिपो के अधिकारी भी घटनास्थल की ओर रवाना हो गए हैं ताकि यात्रियों और उनके परिजनों को हर संभव सहायता प्रदान की जा सके।
पहाड़ी रास्तों पर बढ़ता जोखिम
यह हादसा एक बार फिर पहाड़ी रास्तों पर सफर के जोखिमों को उजागर करता है। क्वाणु और उसके आसपास का क्षेत्र काफी दुर्गम है और संकरी सड़कें अक्सर बड़ी बसों के लिए चुनौती बन जाती हैं। शुरुआती रिपोर्टों में ‘पास’ देने की प्रक्रिया को हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है, लेकिन विस्तृत जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
