सोलन: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले से एक बड़े अंतर्राज्यीय फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग प्राधिकरण (आरएलए) सोलन में ट्रकों के पंजीकरण को लेकर किए गए इस घोटाले ने प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। जांच में जो तथ्य निकलकर सामने आ रहे हैं, वे न केवल चौंकाने वाले हैं बल्कि सरकारी सिस्टम में मौजूद सुरक्षा खामियों की पोल भी खोल रहे हैं।
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा? (उत्तर प्रदेश कनेक्शन)
पुलिस जांच के अनुसार, शातिरों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत उत्तर प्रदेश से खरीदे गए ट्रकों को हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में पंजीकृत (Register) करवा लिया। हैरानी की बात यह है कि इन बाहरी राज्यों के वाहनों के लिए सोलन के स्थानीय क्षेत्र ‘शामती’ के फर्जी पते का उपयोग किया गया।
इस फर्जीवाड़े का एक मुख्य उद्देश्य आर्थिक लाभ कमाना भी था। ट्रकों की वास्तविक वजन उठाने की क्षमता (Payload Capacity) को कागजों में बढ़ाकर दिखाया गया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि ये ट्रक किसी भी कंपनी या ट्रांसपोर्ट फर्म में भारी सामान ढोने के लिए अधिकृत हो सकें और अवैध तरीके से अधिक मुनाफा कमा सकें।
एमबीआई वेरिफिकेशन को किया दरकिनार
नियमों के अनुसार, किसी भी व्यवसायिक वाहन के पंजीकरण से पहले मोटर वाहन निरीक्षक (MVI) द्वारा फिजिकल वेरिफिकेशन अनिवार्य होती है। लेकिन इस मामले में शातिरों ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह बायपास कर दिया। बिना किसी भौतिक सत्यापन के ही ट्रकों को आरटीओ के रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया गया। यह मामला तब प्रकाश में आया जब इन वाहनों के दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई।
क्लर्क की संदिग्ध भूमिका: एक नाम, दो आईडी
इस पूरे प्रकरण में आरएलए सोलन के एक क्लर्क की भूमिका सबसे अधिक संदिग्ध मानी जा रही है। जांच टीम ने पाया कि संबंधित क्लर्क के नाम पर सिस्टम में दो अलग-अलग यूजर आईडी सक्रिय थीं।
- अवैध लॉगिन: जांच में खुलासा हुआ कि एक आईडी का एक्सेस किसी अन्य अज्ञात स्थान से लॉगिन किया जा रहा था।
- बिना सत्यापन रजिस्ट्रेशन: इसी गुप्त लॉगिन का उपयोग करके उत्तर प्रदेश के ट्रकों को बिना किसी औपचारिकता के पंजीकृत किया गया।
- टालमटोल: जब विभाग ने क्लर्क से इस बारे में पूछताछ की, तो उसने संतोषजनक उत्तर देने के बजाय टालमटोल शुरू कर दी। अब संबंधित कर्मचारी पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
फर्जी तरीके से पंजीकृत होने के बाद, ये ट्रक सोलन में रहने के बजाय बिलासपुर जिले के झंडूता क्षेत्र में सामान की ढुलाई के लिए भेज दिए गए। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि ये ट्रक वहां किस कंपनी के लिए काम कर रहे हैं और किस प्रकार का माल ढो रहे हैं। इस संबंध में झंडूता प्रशासन को पत्र लिखकर विस्तृत जानकारी मांगी गई है।
अब तक की जांच और पुलिस की कार्रवाई
शुरुआती जांच में अभी तक तीन ट्रकों के फर्जी पंजीकरण की पुष्टि हो चुकी है। हालांकि, पुलिस को संदेह है कि यह केवल एक बानगी भर है और यह घोटाला बहुत बड़ा हो सकता है।
एसपी सोलन, गौरव सिंह का बयान:
“आरएलए की शिकायत मिलने के बाद हमने जांच शुरू की है। यह स्पष्ट हो चुका है कि यूपी के ट्रकों को सोलन के पते पर रजिस्टर्ड किया गया। हम इस मुख्य नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं जो इस लॉगिन एक्सेस और फर्जीवाड़े के पीछे है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
पुलिस अब इस एंगल पर भी काम कर रही है कि क्या हिमाचल के अन्य आरएलए कार्यालयों में भी इसी तरह की फर्जी आईडी का खेल तो नहीं चल रहा है। साइबर सेल की मदद से उस लोकेशन का पता लगाया जा रहा है जहां से क्लर्क की दूसरी आईडी ऑपरेट की जा रही थी। आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।
सोलन का यह आरएलए स्कैम सरकारी डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़ा करता है। अगर एक ही कर्मचारी के नाम पर दो आईडी चल रही थीं, तो उच्च अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? इस फर्जीवाड़े ने न केवल राजस्व को चूना लगाया है, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सड़क पर दौड़ रहे ये ट्रक सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा हो सकते हैं।
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