शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने राज्य के शहरी क्षेत्रों में विकास की गति को तेज करने और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के लिए एक बड़ा साहसिक कदम उठाया है। प्रदेश सरकार ने राज्य के नगर निकायों (Municipal Bodies) के सुचारू संचालन और बुनियादी ढांचों के सुधार के लिए उपमंडलाधिकारियों (SDM) को विशेष प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार प्रदान किए हैं।
शहरी विकास विभाग (Urban Development Department) द्वारा जारी नवीनतम अधिसूचना के अनुसार, अब संबंधित क्षेत्रों के एसडीएम अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले नगर निकायों में 1 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक के विकास कार्यों को सीधे मंजूरी दे सकेंगे। सरकार का यह निर्णय प्रदेश के 47 नगर निकायों के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है।
क्यों पड़ी इस फैसले की जरूरत? (Context)
हिमाचल प्रदेश के शहरों में अक्सर छोटे-मोटे विकास कार्य जैसे कि नालियों की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट का रखरखाव या सार्वजनिक शौचालयों की सफाई जैसे काम सिर्फ इसलिए अटक जाते थे क्योंकि उनके लिए उच्चाधिकारियों या निदेशालय से प्रशासनिक मंजूरी (Administrative Approval) का इंतजार करना पड़ता था। इस लंबी फाइल प्रक्रिया के कारण जनता को असुविधा होती थी।
अब, नई व्यवस्था के तहत स्थानीय प्रशासन (Local Administration) के पास ही यह शक्ति होगी कि वह 5 लाख रुपये तक के प्रोजेक्ट्स को तुरंत हरी झंडी दे सके। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि जनता की समस्याओं का समाधान भी उनके अपने शहर में ही संभव हो सकेगा।
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विकास कार्यों में अब नहीं आएगी कोई बाधा
सरकार की इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य शहरी सेवाओं को सुव्यवस्थित करना है। नई शक्तियों के साथ, एसडीएम अब पेयजल आपूर्ति, सड़क और फुटपाथ, स्वच्छता और नालियां और स्ट्रीट लाइट जैसे जरुरी कामों की तत्काल मंजूरी दे सकते हैं।
47 नगर निकायों में प्रशासकों की नियुक्ति और नई जिम्मेदारी
हाल ही में प्रदेश सरकार ने राज्य के 47 नगर निकायों में वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारियों (Executive Officers) और सचिवों को प्रशासक (Administrators) के रूप में नियुक्त किया है। यह फैसला उन निकायों के लिए लिया गया है जहाँ वर्तमान में निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल पूरा हो चुका है या प्रशासनिक फेरबदल की आवश्यकता थी।
अधिसूचना के अनुसार, ये प्रशासक अपने निकायों के दैनिक कार्यों के लिए जिम्मेदार होंगे। एसडीएम को वित्तीय अधिकार मिलने से इन प्रशासकों को विकास कार्यों के प्रस्तावों को पास करवाने के लिए अब शिमला के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। यह विकेंद्रीकरण (Decentralization) का एक बेहतरीन उदाहरण है।
इन नगर निकायों में नियुक्त किए प्रशासक
सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार जिन नगर निकायों में प्रशासक नियुक्त किए गए हैं और यह व्यवस्था लागू होगी, उनमें बिलासपुर, श्रीनयनादेवी, घुमारवीं, तलाई, चम्बा, डल्हौजी, चुवाड़ी, सुजानपुर टीहरा, नादौन, भोटा, कांगड़ा, नूरपुर, नगरोटा बगवां, देहरा, ज्वालामुखी, बैजनाथ-पपरोला, जवाली, शाहपुर, कुल्लू, मनाली, भुंतर, बंजार, सुंदरनगर, सरकाघाट, जोगिंद्रनगर, नेरचौक, रिवालसर, करसोग, रोहड़ू, रामपुर, ठियोग, सुन्नी, नारकंडा, चौपाल, कोटखाई, जुब्बल, नाहन, पांवटा साहिब, राजगढ़, नालागढ़, परवाणू, अर्की, संतोसगढ़, मैहतपुर-बसदेहड़ा, दौलतपुर चौक, गगरेट और टाहलीवाल शामिल है।
हिमाचल सरकार का यह निर्णय सीधे तौर पर ‘इज ऑफ लिविंग’ (Ease of Living) को बढ़ावा देने वाला है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इन शक्तियों के साथ पारदर्शिता (Transparency) बनाए रखना भी एक चुनौती होगी। एसडीएम को यह सुनिश्चित करना होगा कि 5 लाख तक के इन कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।
यह नई व्यवस्था तब तक प्रभावी रहेगी जब तक सरकार की ओर से कोई आगामी वैकल्पिक आदेश जारी नहीं किया जाता। कुल मिलाकर, शिमला से लेकर चंबा तक, हिमाचल के शहरों की सूरत बदलने की दिशा में यह एक सराहनीय कदम है।
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