हिमाचल में ‘ग्रीन टू गोल्ड’ क्रांति: भांग की खेती से बदलेगी किसानों की किस्मत, CM सुक्खू का 2000 करोड़ का मास्टरप्लान

On: December 27, 2025 3:49 PM
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शिमला। हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2027 तक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने एक क्रांतिकारी पहल की है। मुख्यमंत्री की ‘ग्रीन टू गोल्ड’ (Green to Gold) योजना के तहत अब राज्य में औद्योगिक भांग की खेती को वैध और विनियमित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक फैसले से न केवल नशा माफिया पर लगाम लगेगी, बल्कि प्रदेश के खजाने में सालाना 2000 करोड़ रुपये तक का राजस्व जुटने की उम्मीद है।

नशा नहीं, अब उद्योग बनेगा पहचान

दशकों से कुल्लू, मंडी और चंबा की घाटियों में जंगली रूप से उगने वाली भांग को अब तक केवल नशे से जोड़कर देखा जाता था। लेकिन सुक्खू सरकार ने इसे एक बहुमूल्य औद्योगिक संसाधन के रूप में पहचाना है।

इन क्षेत्रों में होगा भांग का उपयोग:

  • टेक्सटाइल: पर्यावरण के अनुकूल कपड़ों का निर्माण।
  • कागज और पैकेजिंग: पेड़ों को काटने से बचाने का विकल्प।
  • बायो-फ्यूल और एनर्जी: स्वच्छ ऊर्जा के नए स्रोत।
  • कॉस्मेटिक्स और दवाएं: आयुर्वेदिक और औषधीय उत्पादों में उपयोग।
  • बायो-प्लास्टिक: प्रदूषण मुक्त भविष्य के लिए अत्याधुनिक उत्पाद।

वैज्ञानिक सुरक्षा चक्र: 0.3% से कम होगा THC

इस नीति की सबसे बड़ी खूबी इसका वैज्ञानिक ढांचा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि औद्योगिक भांग में टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल (THC) की मात्रा 0.3 प्रतिशत से कम रखी जाएगी। इसका मतलब है कि यह पौधा नशे के लिए पूरी तरह बेकार होगा, लेकिन इसके फाइबर और बीज की गुणवत्ता उच्च स्तर की बनी रहेगी।

किसानों के लिए क्यों है यह ‘वरदान’?

हिमाचल के किसानों के लिए भांग की खेती पारंपरिक फसलों से कहीं बेहतर साबित होगी:

  1. कम पानी की जरूरत: कपास की तुलना में इसे 50% कम पानी चाहिए।
  2. जानवरों का डर नहीं: जंगली जानवर इस फसल को नुकसान नहीं पहुँचाते।
  3. क्लाइमेट फ्रेंडली: यह जलवायु परिवर्तन के दौर में सबसे सुरक्षित फसल है।
  4. सीधा लाभ: अब मुनाफा नशा माफिया के बजाय सीधे किसानों की जेब में जाएगा।

विश्वविद्यालयों को मिली बड़ी जिम्मेदारी

इस पहल को धरातल पर उतारने के लिए मुख्यमंत्री ने पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय और नौणी उद्यानिकी विश्वविद्यालय को विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। ये संस्थान कम THC वाले उच्च उपज के बीज विकसित करेंगे। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता वाली कमेटी ने उत्तराखंड और मध्य प्रदेश के मॉडल का अध्ययन कर इस रिपोर्ट को तैयार किया है।

“हमारा लक्ष्य नशे को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि उद्योग को मजबूती देना है। 2032 तक हिमाचल को देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाना ही हमारा संकल्प है।” — ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री


भविष्य की राह: स्टार्टअप और रोजगार

‘ग्रीन टू गोल्ड’ पहल से प्रदेश के युवाओं के लिए नए स्टार्टअप के दरवाजे खुलेंगे। हिमाचल अब पर्यावरण अनुकूल निर्माण सामग्री और विशेष वस्त्रों का हब बनेगा। सरकार का यह साहसिक कदम न केवल अर्थव्यवस्था को वैश्विक बायो-इकॉनोमी में अग्रणी बनाएगा, बल्कि ‘आत्मनिर्भर हिमाचल’ के सपने को भी सच करेगा।

Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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