हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत अगर किसी नाम से होती है, तो वह है— “ॐ गण गणपतये नमः”। आज, 22 जनवरी 2026 को माघ मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी है, जिसे हम विनायक चतुर्थी के रूप में मना रहे हैं। यह दिन न केवल एक व्रत या त्योहार है, बल्कि यह एक संकल्प है—अपने भीतर की बुराइयों को खत्म करने और बुद्धि के नए द्वार खोलने का।
आज के दिन का आध्यात्मिक महत्व
चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय है। माघ महीने की इस चतुर्थी का अपना विशेष महत्व है क्योंकि इसके अगले ही दिन बसंत पंचमी का महापर्व आता है। भगवान गणेश को ‘विघ्नहर्ता’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘बाधाओं को हरने वाला’।
जब हम आज के दिन पूरे नियम और निष्ठा से गणेश जी की उपासना करते हैं, तो हमारे मार्ग में आने वाली मानसिक, शारीरिक और आर्थिक बाधाएं स्वतः ही दूर होने लगती हैं। यह दिन उन लोगों के लिए विशेष है जो नए कार्य की शुरुआत करना चाहते हैं या जिन्हें लगता है कि उनके बनते हुए काम बार-बार बिगड़ रहे हैं।
आज की पूजन विधि और शुभ समय
विनायक चतुर्थी की पूजा दोपहर के समय (मध्याह्न काल) में करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
- संकल्प: आज सुबह स्नान के बाद हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।
- स्थापना: घर के मंदिर में या एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।
- अभिषेक: गणेश जी को गंगाजल से स्नान कराएं।
- श्रृंगार: उन्हें सिंदूर का तिलक लगाएं, अक्षत और धूप-दीप अर्पित करें। आज के दिन गणेश जी को 21 दूर्वा (दूब घास) की गांठें चढ़ाना चमत्कारिक लाभ देता है।
- भोग: भगवान गणेश को उनके प्रिय मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
गणेश जी के स्वरूप से जीवन की सीख
आज 22 जनवरी के इस पावन दिन पर हमें उनके स्वरूप से यह सीखना चाहिए:
- बड़ा सिर: अपनी सोच को विस्तृत और दूरगामी रखें।
- छोटे नेत्र: हर कार्य को पूरी एकाग्रता (Focus) के साथ करें।
- बड़े कान: दूसरों की बातों को ध्यान से सुनने का धैर्य रखें।
- लंबी सूंड: बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना सीखें।
विनायक चतुर्थी की पौराणिक कथा
शास्त्रों के अनुसार, जब माता पार्वती ने अपने उबटन से गणेश जी का निर्माण किया और उन्हें द्वार पर पहरा देने को कहा, तब गणेश जी ने अपने कर्तव्य के लिए स्वयं महादेव को भी रोक दिया था। यह कथा हमें सिखाती है कि अपने कर्तव्य (Duty) के प्रति अटूट निष्ठा ही व्यक्ति को साधारण से महान बनाती है। इसी निष्ठा के कारण भगवान शिव ने उन्हें ‘प्रथम पूज्य’ होने का वरदान दिया।
आज के दिन क्या सावधानी बरतें?
- चंद्र दर्शन निषेध: विनायक चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन करना वर्जित माना जाता है। मान्यता है कि आज की रात चंद्रमा देखने से व्यक्ति पर कलंक या मिथ्या दोष लग सकता है। इसलिए रात के समय आकाश की ओर देखने से बचें।
- दान का महत्व: आज के दिन जरूरतमंदों को पीले वस्त्र या फल दान करना अत्यंत फलदायी होता है।
निष्कर्ष
आज 22 जनवरी 2026 की यह चतुर्थी आपके जीवन से सभी बाधाओं को हर ले। गणेश जी ‘बुद्धि’ और ‘सिद्धि’ के स्वामी हैं। उनकी आराधना से न केवल कार्य सफल होते हैं, बल्कि मानसिक शांति भी प्राप्त होती है।
कल से बसंत का आगमन हो रहा है, ऐसे में आज गणेश जी का पूजन हमारे आने वाले समय को और भी मंगलमय बना देगा।
गणपति बप्पा मोरया! मंगल मूर्ति मोरया!
-संदीप शर्मा
