राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की सख्त चेतावनी- FRA मामलों में देरी पर लगेगा जुर्माना, मार्च 2026 तक की डेडलाइन तय

On: January 17, 2026 6:31 PM
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शिमला | हिमाचल प्रदेश के राजस्व, बागवानी और जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने वन अधिकार अधिनियम (FRA-2006) के मामलों को लटकाने वाले अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है। शिमला में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इन मामलों का समयबद्ध निपटारा नहीं हुआ, तो अधिनियम में निहित प्रावधानों के तहत जुर्माना लगाया जाएगा।

उप-मंडल स्तर पर सुस्त कार्रवाई पर जताई चिंता

मंत्री जगत सिंह नेगी ने बैठक के दौरान जिला शिमला में एफआरए मामलों की प्रगति पर गहरी चिंता व्यक्त की। बैठक में सामने आए आंकड़े चौंकाने वाले थे:

  • कुल प्राप्त मामले: ग्राम सभा स्तर पर अब तक 262 मामले प्राप्त हुए।
  • अगली प्रक्रिया: ग्रामीण स्तरीय समितियों (FRC) ने 196 मामले उप-मंडल स्तरीय समितियों को भेजे।
  • चिंताजनक स्थिति: अभी तक उप-मंडल स्तरीय समिति द्वारा एक भी मामला जिला स्तरीय समिति को नहीं भेजा गया है।

मंत्री ने इस सुस्ती पर नाराजगी जाहिर करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि मार्च-2026 तक अधिकतम मामलों का निपटारा सुनिश्चित किया जाए।

किन्हें मिलेगा भूमि का अधिकार?

राजस्व मंत्री ने एफआरए की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह एक जनकल्याणकारी कानून है। इसके तहत:

  1. अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी जो 13 दिसंबर, 2005 से पहले कम से कम तीन पीढ़ियों (लगभग 75 वर्ष) से वन भूमि पर रह रहे हैं, वे पात्र हैं।
  2. जो लोग अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह वन भूमि पर निर्भर हैं, उन्हें भूमि का कानूनी अधिकार दिया जाएगा।
शिमला जिला में समितियों का जाल (ब्लॉक-वार विवरण)

ज़िले में एफआरए को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कुल 2,266 वन अधिकार समितियां गठित की गई हैं। प्रमुख क्षेत्रों का विवरण इस प्रकार है:

क्षेत्र (उप-मंडल)समितियों की संख्या
शिमला ग्रामीण473
ठियोग371
चौपाल277
कोटखाई215
रामपुर216
रोहड़ू170
सुन्नी180

(अन्य क्षेत्र: कुमारसेन-154, जुब्बल-129, कुपवी-53, शिमला शहरी-19, डोडरा-क्वार-09)

ऐतिहासिक संदर्भ

उल्लेखनीय है कि केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार द्वारा वर्ष 2006 में इस अधिनियम को मंजूरी दी गई थी और 1 जनवरी, 2008 से इसे देशभर में लागू किया गया था। इसका उद्देश्य वन निवासियों के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को समाप्त करना है।

इस महत्वपूर्ण बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा, उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप, जनजातीय विकास के संयुक्त निदेशक कैलाश चौहान सहित जिले के सभी एसडीएम, तहसीलदार और वन अधिकारी उपस्थित रहे।

Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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