हिमाचल सरकार का ‘व्यवस्था परिवर्तन’ विज़न: गद्दी समुदाय की आजीविका को मिलेगी नई उड़ान

On: January 16, 2026 8:22 PM
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Gaddi community will get a new boost
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शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की ‘व्यवस्था परिवर्तन’ पहल के तहत हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक गद्दी समुदाय के जीवन स्तर को सुधारने के लिए सरकार ने रणनीतिक प्रयासों को नई गति दी है। पशुपालकों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ मानते हुए राज्य सरकार ने ‘हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में चरवाहों के लिए रोज़गार’ परियोजना को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य चरवाहा प्रथाओं का आधुनिकीकरण और पशुपालकों की आय में वृद्धि करना है।

परियोजना के मुख्य उद्देश्य: आधुनिकीकरण और संरक्षण

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लक्ष्य केवल आर्थिक सशक्तिकरण ही नहीं, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन और देशी नस्लों का संरक्षण भी है। इसके तहत:

  • नस्ल सुधार: गद्दी भेड़-बकरी, रामपुर बुशहरी भेड़ और चेगु बकरियों जैसी स्थानीय नस्लों के अनुवांशिक सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
  • आधुनिक तकनीक: पशुधन का डिजिटल पंजीकरण, कृत्रिम गर्भाधान, क्रॉस-ब्रीडिंग और मोबाइल पशु चिकित्सा सेवाओं जैसी तकनीकों को लागू किया जाएगा।
  • डिजिटल पहल: ‘भेड़-बकरी ओनर्स डिजिटल हर्ड आइडेन्टीफिकेशन’ वेब प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप के जरिए पशुपालकों का रिकॉर्ड और उनके प्रवास मार्गों की मैपिंग की जाएगी।
बाजार और बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण

पशुपालकों को उनके उत्पादों का सही दाम दिलाने के लिए सरकार ऊन, बकरी के दूध, मक्खन और मांस के विपणन (Marketing) के लिए ठोस ढांचा तैयार कर रही है। इसमें ऊन की गुणवत्ता का प्रमाणन और प्रचार-प्रसार तंत्र शामिल होगा। साथ ही, संवेदनशील सीमा क्षेत्रों के पशुपालकों के लिए विशेष वित्तीय प्रोत्साहन और बीमा कवरेज का प्रावधान भी किया गया है।

पशुपालकों के हक में बड़े निर्णय

मुख्यमंत्री ने पशुपालकों के हितों की रक्षा के लिए दो महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं:

  1. चरागाह अधिकार: वन विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे गद्दी समुदाय के पारंपरिक चरागाह अधिकारों (Grazing Rights) में कोई हस्तक्षेप न करें।
  2. न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): सरकार आगामी बजट में ऊन के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि पर विचार कर रही है, ताकि पशुपालकों को आर्थिक मजबूती मिल सके।
प्रवासी और स्थायी आबादी को लाभ

राज्य में लगभग 6.4 लाख भेड़ आबादी (प्रवासी और स्थायी दोनों) को सुदृढ़ करने के लिए ‘डुअल ब्रीडिंग’ रणनीति अपनाई जाएगी। इसमें विशेष रूप से गद्दी भेड़ों की नस्ल को सुधारने के लिए मेरिनो और रैम्बौइलेट नस्लों के साथ क्रॉस-ब्रीडिंग की योजना है।

Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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