सोलन: हिमाचल प्रदेश के निचले और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों, विशेषकर सोलन और सिरमौर जिलों में इस समय सेब के बागवान दोहरी चुनौती का सामना कर रहे हैं। एक ओर जहां बगीचों में सर्दियों के महत्वपूर्ण कार्यों (Winter Management) का समय है, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से बारिश न होने के कारण सूखे (Drought) जैसी स्थिति पैदा हो गई है।
कृषि और बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, नमी की कमी के कारण पौधों की सुप्त अवस्था (Dormancy) प्रभावित हो रही है। इस विषम परिस्थिति में बागवानों को बेहद सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
सूखे के दौरान क्या करें?
- मल्चिंग (Mulching) को प्राथमिकता दें: नमी बचाने का यह सबसे कारगर तरीका है। सेब के तौलिए (Basins) में घास, सूखी पत्तियां या पुआल की 4-6 इंच मोटी परत बिछाएं। यह जमीन से पानी के वाष्पीकरण को रोकेगा।
- हल्की सिंचाई: यदि आपके पास पानी के स्रोत (टैंक या बावड़ी) उपलब्ध हैं, तो भारी सिंचाई के बजाय हल्की और बार-बार सिंचाई करें। ड्रिप इरिगेशन का उपयोग इस समय जीवनदान साबित हो सकता है।
- पौधों की उम्र के अनुसार खाद: यदि मिट्टी में थोड़ी भी नमी है, तो केवल सड़ी हुई गोबर की खाद या ‘कम्पोस्ट’ का प्रयोग करें। रासायनिक खाद का प्रयोग बिना नमी के करने से बचें।
- तौलिए की सफाई: तौलिए में खरपतवार (Weeds) न उगने दें, क्योंकि ये मिट्टी की बची-कुची नमी को सोख लेते हैं।
क्या न करें?
- भारी प्रूनिंग (Pruning) से बचें: सूखे की स्थिति में पौधों की बहुत अधिक काट-छाँट न करें। ज्यादा कट लगाने से पौधों से नमी का नुकसान तेजी से होता है और घाव भरने में देरी होती है।
- बिना नमी के उर्वरक न डालें: सूखे खेत में यूरिया या अन्य रासायनिक खादों का प्रयोग कतई न करें। नमी के अभाव में ये खादें जड़ों को जला सकती हैं (Root Burn)।
- जुताई से परहेज: सूखे के दौरान बगीचों में गहरी जुताई न करें, इससे मिट्टी की निचली परतों की नमी भी खत्म हो जाती है।
विशेषज्ञों की सलाह: आगामी कार्यों के लिए रणनीति
बोरिक एसिड और जिंक का छिड़काव: जैसे ही हल्की बारिश या बर्फबारी हो, बागवान विशेषज्ञ की सलाह से सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव कर सकते हैं ताकि आने वाले सीजन में फूल आने की प्रक्रिया सही रहे।
कीट नियंत्रण (Sanitation): सूखे मौसम में ‘वूली एफिड’ और ‘माइट्स’ का खतरा बढ़ जाता है। तनों पर चूने और कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का लेप (Paste) जरूर लगाएं ताकि छाल सुरक्षित रहे।
जल भंडारण की योजना: यह समय इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में ‘वॉटर हार्वेस्टिंग’ ही एकमात्र विकल्प है। अपने बगीचों में छोटे प्लास्टिक टैंक या चेक-डैम बनाने की योजना तैयार करें।
मुख्य नोट: सोलन और सिरमौर के वे बागवान जो ‘अर्ली वैरायटी’ (जल्दी पकने वाली किस्मों) पर काम कर रहे हैं, उन्हें नमी प्रबंधन पर सबसे अधिक ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि इन क्षेत्रों में तापमान जल्दी बढ़ना शुरू हो जाता है।
