समस्या: सपरून में अधूरा फुटपाथ बना लोगों के लिए मुसीबत

Himachal

18 लाख रुपये खर्च, फिर भी निर्माण अधूरा — ठेकेदार को नोटिस जारी

सोलन। शहर के सपरून क्षेत्र में लंबे समय से अधूरा पड़ा फुटपाथ अब आम जनता के लिए गंभीर खतरे का कारण बनता जा रहा है। नगर निगम सोलन द्वारा फुटपाथ निर्माण के लिए ठेकेदार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है, लेकिन करीब 18 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है।

जानकारी के अनुसार फुटपाथ निर्माण कार्य डिविएशन (डिज़ाइन में बदलाव) के कारण बीच में ही रोक दिया गया था। ठेकेदार का तर्क है कि डिविएशन के चलते लागत में वृद्धि हुई है और मौजूदा राशि में काम पूरा करना संभव नहीं है, जिस कारण अतिरिक्त भुगतान की मांग की गई है।

🚶‍♂️ पैदल चलना बना जान जोखिम में डालना
फुटपाथ अधूरा रहने से वार्ड-13 और वार्ड-14 के लोगों को मजबूरी में तेज रफ्तार वाहनों के बीच से गुजरना पड़ रहा है। इससे आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है। बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों के लिए यह मार्ग सबसे अधिक खतरनाक साबित हो रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि दिवाली तक फुटपाथ निर्माण पूरा होने की उम्मीद थी, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।

💰 बजट बढ़ा, फिर भी काम अधूरा
वार्ड-14 के पार्षद एवं पूर्व डिप्टी मेयर राजीव कोड़ा के प्रयासों से सपरून क्षेत्र में पार्किंग, फुटपाथ और वाटर स्टोरेज टैंक के निर्माण की योजना बनी थी, जिस पर 50 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च की जानी है।

यदि समय रहते फुटपाथ का निर्माण पूरा हो जाता, तो वार्ड -14 हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, कमल ऑचार्ड सोसाइटी, सपरून पंचायत, वार्ड-16 रबोन और देऊंघाट की ओर आने-जाने वाले हजारों लोगों को राहत मिलती।

🏗️ मंत्रियों की मौजूदगी में हुआ था शिलान्यास
गौरतलब है कि 19 जनवरी 2025 को स्थानीय विधायक एवं मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल तथा लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह की मौजूदगी में सपरून बाइपास परियोजना का शिलान्यास किया गया था।

इस दौरान 30 लाख रुपये से पार्किंग, 20 लाख रुपये से फुटपाथ और 8.08 लाख रुपये से पार्क निर्माण कार्य की आधारशिला रखी गई थी तथा समय सीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए थे।

हालांकि 11 महीने बीत जाने के बाद भी कार्य अधूरा है।

🏛️ नगर निगम का पक्ष
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि यदि डिविएशन नियमों के अंतर्गत आता है तो उस पर जनहित को ध्यान में रखते हुए विचार किया जाएगा। फिलहाल ठेकेदार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है और मामले की समीक्षा की जा रही है।

अब देखना यह होगा कि यह अधूरा फुटपाथ कब तक पूरा होता है या फिर आम लोगों को यूं ही जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ेगा।

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