हिमाचल निकाय चुनाव सुप्रीम कोर्ट फैसला 31 मई डेडलाइन ग्राफिक्स

हिमाचल पंचायत चुनाव: सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश, 31 मई तक हर हाल में कराने होंगे चुनाव

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शिमला। अक्षय चौहान, 13 फरवरी 2026 : हिमाचल प्रदेश में पंचायत और शहरी निकायों के चुनावों को लेकर चल रही अनिश्चितता पर आज सुप्रीम कोर्ट ने विराम लगा दिया है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 31 मई 2026 से पहले प्रदेश में हर हाल में चुनाव संपन्न कराए जाएं।

​’पुनर्सीमांकन के नाम पर नहीं टल सकते चुनाव’

​मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जयमाल्या बागची की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के चुनावों को पुनर्सीमांकन (Delimitation) जैसे प्रशासनिक कार्यों के बहाने अनिश्चितकाल के लिए नहीं टाला जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है।

​चुनाव आयोग की तैयारी: आरक्षण रोस्टर का इंतजार

​सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग भी एक्शन मोड में आ गया है। आयोग की मुख्य अपडेट्स इस प्रकार हैं:

  • आरक्षण रोस्टर: आयोग ने पंचायतीराज विभाग को निर्देश दिया है कि आरक्षण रोस्टर जल्द से जल्द जारी किया जाए, ताकि चुनावी प्रक्रिया को गति मिल सके।
  • मतदाता सूची: मतदाता सूचियों के प्रकाशन और छपाई का कार्य पूर्ण हो चुका है। वर्तमान में ये सूचियां खंड विकास अधिकारी (BDO) और संबंधित पंचायतों में उपलब्ध करवा दी गई हैं।
  • नए वोटरों के लिए मौका: जो नागरिक अभी तक मतदाता सूची में शामिल नहीं हुए हैं, वे 50 रुपये का शुल्क जमा कर अपना नाम जुड़वा सकते हैं।

​हाई कोर्ट बनाम सुप्रीम कोर्ट: क्या था मामला?

​इससे पहले हिमाचल हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए 30 अप्रैल तक चुनाव कराने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने इस समय सीमा को व्यावहारिक न बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को मामूली राहत देते हुए समय सीमा को बढ़ाकर 31 मई कर दिया है, लेकिन चुनाव कराने की अनिवार्यता पर मुहर लगा दी है।

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