बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी MIS DBT भुगतान पर जानकारी देते हुए

हिमाचल के सेब बागवानों को राहत, अब DBT से सीधे खाते में आएगा MIS भुगतान

Himachal

शिमला। हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अब मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) के तहत सेब का भुगतान सीधे बागवानों के बैंक खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से किया जाएगा। राज्य सरकार ने यह फैसला बागवानों की लंबे समय से चली आ रही मांग और भुगतान में हो रही देरी को देखते हुए लिया है।

अब तक एमआईएस योजना के अंतर्गत एचपीएमसी के माध्यम से दवाइयों, खाद और औजारों के रूप में भुगतान किया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत बागवानों को नकद राशि सीधे खाते में मिलेगी, जिससे वे अपनी जरूरत के अनुसार धन का उपयोग कर सकेंगे।

HPMC पर बागवानों के 115 करोड़ रुपये बकाया
बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि एमआईएस योजना के तहत अभी एचपीएमसी पर सेब बागवानों के करीब 115 करोड़ रुपये बकाया हैं। इससे पहले सरकार द्वारा 154 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि शेष राशि के भुगतान की प्रक्रिया भी शीघ्र शुरू की जा रही है, ताकि बागवानों को आर्थिक संकट से राहत मिल सके।

पहले छोटे बागवानों को मिलेगा लाभ
बागवानी मंत्री ने स्पष्ट किया कि डीबीटी के माध्यम से भुगतान की शुरुआत छोटे और सीमांत बागवानों से की जाएगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से बड़े बागवानों को भुगतान किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि छोटे बागवानों को समय पर आर्थिक सहायता मिले, जिससे वे अगली फसल की तैयारी बिना किसी बाधा के कर सकें।

MIS योजना को लेकर भाजपा पर निशाना
जगत सिंह नेगी ने कहा कि एमआईएस योजना मूल रूप से केंद्र सरकार की थी, लेकिन पूर्व भाजपा सरकार द्वारा इसे बंद कर दिया गया था, जिससे हिमाचल के सेब बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से इस योजना को दोबारा आगे बढ़ाया और बागवानों को राहत देने का प्रयास किया।

सेब आयात शुल्क पर भी जताई चिंता
बागवानी मंत्री ने विदेशी सेब के आयात पर शुल्क कम किए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री हिमाचल में सेब बागवानों की चिंता की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर न्यूजीलैंड और अमेरिका के दबाव में आयात शुल्क घटाया जा रहा है, जिससे प्रदेश के सेब उत्पादकों पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आयात नीति में बदलाव नहीं हुआ, तो आने वाले समय में हिमाचल के सेब बागवानों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में DBT के जरिए MIS भुगतान का फैसला बागवानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

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