हमीरपुर: डिजिटल इंडिया के संकल्प को धरातल पर उतारने और तकनीकी शिक्षा को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालने की दिशा में हिमाचल प्रदेश का राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) हमीरपुर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है। हाल ही में दूरसंचार विभाग (DoT) के अतिरिक्त महानिदेशक (Addl. DGT) एवं हिमाचल प्रदेश लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र (LSA) के सलाहकार अनिल कुमार गुप्ता ने एनआईटी हमीरपुर का दौरा कर वहां स्थापित ‘5G यूज़ केस लैब’ की प्रगति का जायजा लिया।
छात्रों और स्टार्टअप्स के लिए खुले शोध के द्वार
निरीक्षण के दौरान अनिल कुमार गुप्ता ने लैब के उपयोग, वर्तमान गतिविधियों और आगामी परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 5G यूज़ केस लैब्स का प्राथमिक उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों और शैक्षणिक समुदाय के बीच 5G तकनीकों में दक्षता पैदा करना है।
यह लैब स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्रों को वास्तविक 5G वातावरण में काम करने का दुर्लभ अवसर प्रदान करती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह प्रयोगशाला केवल संस्थान के छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के स्टार्टअप्स, एमएसएमई (MSMEs) और अन्य तकनीकी कंपनियों के लिए भी सुलभ है, ताकि वे अपने समाधानों का परीक्षण और विकास कर सकें।
दौरे के दौरान DoT के वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें उप महानिदेशक (प्रौद्योगिकी) संदीप आर्य और सहायक निदेशक रमेश कुमार शामिल थे, ने संस्थान के संकाय सदस्यों एवं छात्रों के साथ सीधा संवाद किया। एनआईटी हमीरपुर के निदेशक प्रो. एच. एम. सूर्यवंशी के साथ आयोजित एक अनौपचारिक बैठक में दूरसंचार विभाग की नागरिक-केंद्रित पहलों पर चर्चा की गई।
प्रो. सूर्यवंशी ने कहा, “एनआईटी हमीरपुर में 5G लैब की स्थापना छात्रों और शोधकर्ताओं को अत्याधुनिक तकनीकों पर कार्य करने तथा राष्ट्रीय डिजिटल पहलों में योगदान देने के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करती है।”
‘संचार मित्र’ और ‘संचार साथी’ पोर्टल: डिजिटल सुरक्षा पर जोर
इस दौरे का एक प्रमुख आकर्षण DoT अधिकारियों का ‘संचार मित्रों’ के साथ संवाद रहा। ये ‘संचार मित्र’ दूरसंचार विभाग की योजना के तहत छात्र स्वयंसेवक हैं, जो समाज में डिजिटल साक्षरता और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को बढ़ावा देते हैं।
अधिकारियों ने इन डिजिटल दूतों को सलाह दी कि वे आम जनता के बीच ‘संचार साथी’ पोर्टल की प्रमुख सुविधाओं के बारे में जागरूकता फैलाएं, जैसे:
- खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन को ट्रैक और ब्लॉक करना।
- अनधिकृत कनेक्शनों की निगरानी और रिपोर्टिंग।
- दूरसंचार धोखाधड़ी (Cyber Fraud) के विरुद्ध सुरक्षा उपाय।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग के विभागाध्यक्ष और नोडल अधिकारी डॉ. अश्वनी राणा ने जानकारी दी कि यह लैब शिक्षा और उद्योग के बीच एक प्रभावी सेतु के रूप में कार्य कर रही है। रजिस्ट्रार डॉ. अर्चना संतोष नानोटी ने भी माना कि ऐसे दौरों से कैंपस समुदाय में साइबर धोखाधड़ी के प्रति जागरूकता बढ़ती है।
5G तकनीक न केवल शहरी बल्कि ग्रामीण कनेक्टिविटी और डिजिटल समावेशन (Digital Inclusion) में भी क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली है। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में, जहाँ भौगोलिक चुनौतियां अधिक हैं, वहां 5G आधारित नवाचार स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में नई राहें खोल सकते हैं।
यह दो दिवसीय सफल दौरा डॉ. राकेश शर्मा और डॉ. संदीप कुमार सिंह के समन्वय में संपन्न हुआ, जिन्होंने भविष्य में भी तकनीकी प्रगति को गति देने की प्रतिबद्धता दोहराई।
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