शिमला: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की तैयारी पूरी कर ली है। अब राज्य के 100 से अधिक सरकारी स्कूल पूरी तरह CBSE की तर्ज पर चलेंगे। लेकिन सबसे बड़ा ट्विस्ट शिक्षकों की तैनाती को लेकर है। अब इन स्कूलों में शिक्षक ‘सिफारिश’ या ‘सीधे तबादले’ से नहीं, बल्कि एंट्रेंस टेस्ट और मेरिट के आधार पर नियुक्त होंगे।
📋 नया ‘सब-कैडर’ और ट्रांसफर पर कड़े नियम
शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों के लिए एक अलग ‘सेपरेट कैडर’ तैयार किया है। इस नई नीति की सबसे बड़ी बात यह है कि इन स्कूलों में होने वाली नियुक्तियां नॉन-ट्रांसफरेबल (गैर-स्थानांतरणीय) होंगी।
- 10 साल का बंधन: एक बार इन स्कूलों में ज्वाइन करने के बाद शिक्षकों को कम से कम 10 साल वहीं सेवा देनी होगी।
- मर्जिंग पॉलिसी: टेस्ट पास कर सीबीएसई स्कूलों में आने वाले शिक्षक हमेशा के लिए इसी कैडर में मर्ज हो जाएंगे। वे सामान्य स्कूलों में ट्रांसफर के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे।
📝 कैसे होगी शिक्षकों की भर्ती?
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों को ही इन स्कूलों में आने का पहला मौका मिलेगा, लेकिन इसके लिए उन्हें एक स्क्रीनिंन टेस्ट से गुजरना होगा।
- बोर्ड लेगा टेस्ट: राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड इस परीक्षा का आयोजन करेगा।
- काउंसिलिंग से पोस्टिंग: टेस्ट की मेरिट लिस्ट बनेगी और फिर काउंसिलिंग के जरिए शिक्षकों को स्कूलों के विकल्प (स्टेशन) दिए जाएंगे।
- नई भर्ती: जो पद खाली रह जाएंगे, उन्हें राज्य चयन आयोग के माध्यम से नई सीधी भर्ती के जरिए भरा जाएगा।
🧮 गणित और अंग्रेजी के ‘डर’ को खत्म करने का मास्टर प्लान
सरकार ने माना है कि हिमाचल के बच्चों में मैथ्स और इंग्लिश को लेकर कमजोरी देखी गई है। इस कमजोरी को दूर करने के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं:
- 800 विशेष शिक्षक: अंग्रेजी और गणित के लिए 400-400 अतिरिक्त पद स्वीकृत किए गए हैं।
- 5 साल का अनुबंध: ये भर्तियां स्कीम आधारित होंगी और 5 साल के फिक्स पीरियड के लिए की जाएंगी।
🏫 स्कूलों में क्या होगा खास?
शिक्षा सचिव राकेश कंवर के अनुसार, अब तक 96 स्कूलों को सीबीएसई से एफीलिएशन मिल चुका है और करीब 20 और स्कूल लाइन में हैं। इन स्कूलों को एक ‘मॉडल स्कूल’ की तरह विकसित किया जाएगा जहाँ:
- म्यूजिक, स्पोर्ट्स और काउंसलिंग के लिए अलग टीचर होंगे।
- चौकीदार, स्वीपर और मल्टी टास्क वर्कर की अलग से तैनाती होगी।
- क्वालिफिकेशन में कोई समझौता नहीं होगा—चाहे शिक्षक कितना भी अनुभवी हो, उसे टेस्ट देना ही होगा।
बड़ी बात: “सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों का चयन पूरी तरह पारदर्शी होगा। हम छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए शिक्षकों की गुणवत्ता पर सबसे ज्यादा जोर दे रहे हैं।” — शिक्षा विभाग, हिमाचल प्रदेश
