शिमला, हिमालयन डॉन, 17 जून। हिमाचल प्रदेश के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में स्कूल प्रबंधन समितियों (SMC) का नए सिरे से गठन किया जाएगा। शिक्षा मंत्रालय की नई गाइडलाइन के तहत अब एसएमसी को केवल स्कूल प्रबंधन तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें संसाधन जुटाने, आधारभूत ढांचे को मजबूत करने और सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं।
समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक राजेश शर्मा ने प्रदेश के सभी उपनिदेशकों (उच्च, प्रारंभिक एवं गुणवत्ता शिक्षा) को निर्देश जारी करते हुए नई व्यवस्था को लागू करने के आदेश दिए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 के अनुरूप जारी की गई यह गाइडलाइन पहले की सभी व्यवस्थाओं का स्थान लेगी।
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष में सोशल ऑडिट कराना एसएमसी के लिए अनिवार्य होगा। साथ ही विभिन्न विभागों और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) गतिविधियों के साथ समन्वय स्थापित कर स्कूलों के विकास के लिए संसाधन जुटाने की जिम्मेदारी भी समिति निभाएगी।
गाइडलाइन के अनुसार स्कूल खुलने के एक महीने के भीतर एसएमसी का गठन होना चाहिए, लेकिन इस बार दिशा-निर्देशों में देरी के कारण 30 जून 2026 तक गठन की समय-सीमा तय की गई है। सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 5 जुलाई तक नई एसएमसी के गठन की अनुपालन रिपोर्ट निदेशालय को भेजना सुनिश्चित करें।
राज्य सरकार ने शिक्षा मंत्रालय की इन नई गाइडलाइनों को बिना किसी संशोधन के पूरे प्रदेश में लागू करने को मंजूरी दे दी है।
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