हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड शुल्क वृद्धि और शिक्षक मानदेय विवाद - हिमालयन डॉन ब्यूरो

हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड बना ‘कमाई का अड्डा’: डॉ. मामराज पुंडीर

Shimla

हिमालयन डॉन संवाददाता, शिमला | अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। महासंघ के पूर्व प्रांत महामंत्री डॉ. मामराज पुंडीर ने बोर्ड प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए इसे ‘कमाई का अड्डा’ करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बोर्ड पिछले तीन वर्षों से लगातार शुल्कों में बेतहाशा वृद्धि कर गरीब छात्रों और अभिभावकों का आर्थिक शोषण कर रहा है।

​छात्रों पर आर्थिक बोझ: पुनर्मूल्यांकन के नाम पर ‘वसूली’

​डॉ. पुंडीर ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बोर्ड ने पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) के लिए 1000 रुपये और री-चेकिंग के लिए 800 रुपये प्रति विषय का शुल्क निर्धारित किया है। उन्होंने इसे मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों के साथ सरासर अन्याय बताया।

​”शिक्षा को व्यापार बनाया जा रहा है। एक तरफ छात्र अपनी मेहनत का परिणाम सुधारने की उम्मीद करते हैं, तो दूसरी तरफ बोर्ड उन पर भारी भरकम फीस का बोझ लाद देता है। इसे तुरंत कम किया जाना चाहिए।” — डॉ. मामराज पुंडीर

शिक्षकों की अनदेखी: ‘मेहनतनामा’ डकार गया बोर्ड?

छात्रों के शोषण के साथ-साथ डॉ. पुंडीर ने शिक्षकों की बदहाली का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 की बोर्ड परीक्षाओं के संचालन और मूल्यांकन कार्य में जुटे हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों को अभी तक उनका मानदेय (Honorarium) नहीं मिला है। उन्होंने आक्रोश जताते हुए कहा कि बोर्ड छात्रों से तो करोड़ों रुपये वसूल रहा है, लेकिन शिक्षकों का वाजिब पैसा दबाए बैठा है।

​प्रमुख मांगें और चेतावनी

​डॉ. पुंडीर ने प्रदेश सरकार से इस गंभीर मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। महासंघ की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

  • शुल्क कटौती: पुनर्मूल्यांकन और री-चेकिंग की फीस को तत्काल तर्कसंगत बनाया जाए।
  • बजट जारी हो: बोर्ड प्रशासन अविलंब बजट आवंटित कर शिक्षकों के लंबित मानदेय का भुगतान करे।
  • नीतिगत सुधार: बोर्ड की कार्यप्रणाली को छात्र और शिक्षक हितैषी बनाया जाए।

आंदोलन की चेतावनी: डॉ. पुंडीर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि बोर्ड ने अपनी नीतियों में सुधार नहीं किया और शिक्षकों का भुगतान जल्द नहीं किया, तो अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ चुप नहीं बैठेगा। संगठन जल्द ही प्रदेश व्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह बोर्ड प्रशासन की होगी।

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