सोलन (हिमालयन डॉन)। डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौनी ने सोलन ज़िले के किसानों और बागवानों के लिए आगामी 5 दिनों का महत्वपूर्ण कृषि-मौसम बुलेटिन जारी किया है। अगले कुछ दिनों में तापमान में बढ़ोतरी और शुष्क मौसम रहने की संभावना है, जो फसलों और पशुधन को प्रभावित कर सकता है।
🌡️ मौसम का मिजाज: गर्मी और शुष्कता बढ़ेगी
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 22 से 26 अप्रैल तक सोलन में मौसम पूरी तरह शुष्क रहेगा।
- तापमान की मार: अधिकतम तापमान 32°C से 34°C के बीच रहने की उम्मीद है, जबकि न्यूनतम तापमान 14°C से 15°C तक रहेगा।
- हवा की चाल: उत्तर-पश्चिम दिशा से 10.4 से 11.4 किमी/घंटा की गति से हवाएं चलेंगी।
- नमी में गिरावट: सापेक्ष आर्द्रता का स्तर घटकर 13% से 35% के बीच रह सकता है, जिससे फसलों में पानी की कमी होने का डर है।
🍎 बागवानों के लिए जरूरी सलाह: सेब और गुठलीदार फल
बढ़ते तापमान और कम नमी को देखते हुए बागवानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है:
- नमी बचाएं: सेब, खुबानी और प्लम के पौधों के चारों ओर (बेसिन में) 10 सेमी मोटी भूसे की मल्चिंग बिछाएं ताकि मिट्टी की नमी सुरक्षित रहे。
- कीटों पर नज़र: सेब की फसल में थ्रिप्स और माइट्स की नियमित निगरानी करें। प्रकोप दिखने पर 10 मिली/लीटर पानी में हॉर्टिकल्चरल मिनरल ऑयल का छिड़काव करें।
- सिंचाई प्रबंधन: खुबानी की कटाई से 10-15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें।
🥦 सब्जियों और फसलों के लिए टिप्स
- बुवाई का सही समय: किसान अब भिंडी, खीरा, कद्दू और फ्रेंच बीन्स जैसी ग्रीष्मकालीन सब्जियों की बुवाई शुरू कर सकते हैं।
- लहसुन की कटाई: जब लहसुन की फसल की गर्दन 50% तक झुक जाए (नेक फॉल), तब इसकी कटाई कर लें।
- टमाटर और मिर्च: पौधों के आधार के चारों ओर मल्च बिछाएं और वाष्पीकरण कम करने के लिए सिंचाई केवल सुबह या शाम के समय ही करें।
🐄 पशुपालकों के लिए डाइट चार्ट
- कैल्शियम का ध्यान: जो पशु इन दिनों धान के पुआल (rice straw) पर निर्भर हैं, उन्हें कैल्शियम सप्लीमेंट जरूर दें ताकि कैल्शियम की कमी और आंतों में रुकावट से बचा जा सके।
- हरा चारा: दूध उत्पादन बढ़ाने और पशुओं को ‘अफारा’ (Bloat) से बचाने के लिए बरसीम और जई जैसे हरे चारे का नियमित सेवन कराएं।
🌿 प्राकृतिक खेती के लिए नुस्खे
प्राकृतिक खेती करने वाले किसान कीटों के नियंत्रण के लिए अग्निअस्त्र, ब्रह्मास्त्र, नीमास्त्र और दशपर्णी अर्क (3.0% घोल) का साप्ताहिक छिड़काव करें। नियमित अंतराल पर 10.0% जीवामृत का छिड़काव भी अत्यंत प्रभावी रहेगा।
💡 एक्सपर्ट टिप: मौसम और कृषि संबंधी ताज़ा जानकारी के लिए अपने मोबाइल पर ‘Meghdoot’ ऐप और बिजली गिरने की चेतावनी के लिए ‘Damini’ ऐप अवश्य डाउनलोड करें।
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