हिमाचल कॉलेजों में नई शिक्षा नीति के तहत सेमेस्टर सिस्टम और मल्टीपल एंट्री-एग्जिट व्यवस्था लागू

हिमाचल के कॉलेजों में शिक्षा का नया अध्याय: 2026-27 से सेमेस्टर सिस्टम और मल्टीपल एंट्री-एग्जिट लागू

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हिमालयन डॉन, शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी डिग्री कॉलेजों में अब उच्च शिक्षा का स्वरूप बदलने जा रहा है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रदेश के स्नातक स्तर पर सेमेस्टर सिस्टम के साथ-साथ मल्टीपल एंट्री और एग्जिट व्यवस्था लागू की जाएगी। इस संबंध में शनिवार को अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिससे कॉलेज शिक्षा में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है।

नई व्यवस्था के तहत अब छात्रों को साल में एक बार नहीं, बल्कि दो बार परीक्षाएं देनी होंगी। इसके साथ ही पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले विद्यार्थियों के लिए भी रास्ते खुले रहेंगे। यदि कोई छात्र एक वर्ष की पढ़ाई पूरी कर सिस्टम से बाहर निकलना चाहता है, तो उसे निर्धारित 44 क्रेडिट पूरे करने पर स्नातक सर्टिफिकेट मिलेगा। वहीं दो वर्ष यानी चार सेमेस्टर पूरे करने और 86 क्रेडिट अर्जित करने पर स्नातक डिप्लोमा प्रदान किया जाएगा।

तीन वर्ष (छह सेमेस्टर) की पढ़ाई पूरी करने पर 128 क्रेडिट के साथ सामान्य स्नातक डिग्री मिलेगी, जबकि चार वर्षीय पाठ्यक्रम (आठ सेमेस्टर) पूरा करने वाले छात्रों को 168 क्रेडिट के साथ ऑनर्स या रिसर्च डिग्री दी जाएगी। खास बात यह है कि चार वर्षीय डिग्री कोर्स फिलहाल चुनिंदा कॉलेजों में ही शुरू होगा, जिनकी सूची बाद में जारी की जाएगी।

नई शिक्षा नीति के अनुरूप लागू हो रही इस प्रणाली में “री-एंट्री” का भी प्रावधान रखा गया है। यानी यदि कोई छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ देता है, तो वह तय समय सीमा के भीतर दोबारा प्रवेश लेकर अपनी डिग्री पूरी कर सकता है। यूजी सर्टिफिकेट या डिप्लोमा के बाद एग्जिट लेने वाले विद्यार्थियों को तीन वर्ष के भीतर दोबारा प्रवेश लेना होगा, जबकि पूरा डिग्री प्रोग्राम अधिकतम सात वर्षों में पूरा करना अनिवार्य रहेगा।

इसके अलावा छात्रों को अब ऑनलाइन माध्यम से भी पढ़ाई का विकल्प मिलेगा। वे कुल क्रेडिट का अधिकतम 40 प्रतिशत ऑनलाइन कोर्स के जरिए अर्जित कर सकेंगे। शिक्षा विभाग ने पहले चरण में ऐसे कॉलेजों में चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है, जहां छात्रों की संख्या 1500 या उससे अधिक है।

इस नई व्यवस्था से न केवल शिक्षा अधिक लचीली और रोजगारोन्मुख बनेगी, बल्कि छात्रों को अपनी सुविधा और परिस्थितियों के अनुसार पढ़ाई जारी रखने का अवसर भी मिलेगा। हिमाचल के कॉलेजों में यह बदलाव उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।

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