हिमालयन डॉन, धर्म डेस्क। अक्षय तृतीया—एक ऐसा दिन जब ब्रह्मांड की ऊर्जा स्वयं आपके द्वार पर समृद्धि और शुभता की दस्तक देती है। सनातन धर्म में ‘अक्षय’ का अर्थ है जिसका कभी क्षय (विनाश) न हो। माना जाता है कि इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य, दान या निवेश अनंत काल तक फल देता है।
वर्ष 2026 में यह पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं इस दिन का विशेष महत्व, शुभ मुहूर्त और इससे जुड़ी वो रोचक बातें जो इसे इतना खास बनाती हैं।
📅 तिथि और शुभ मुहूर्त (Akshaya Tritiya 2026 Muhurat)
साल 2026 में वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को लेकर गणना इस प्रकार है:
- अक्षय तृतीया तिथि: रविवार, 19 अप्रैल 2026
- तृतीया तिथि प्रारंभ: 19 अप्रैल, सुबह 10:49 बजे से
- तृतीया तिथि समाप्त: 20 अप्रैल, सुबह 07:27 बजे तक
- पूजा का सबसे शुभ समय: सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक (दिल्ली और उत्तर भारत के समय अनुसार)
- सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त: 19 अप्रैल सुबह 10:49 से लेकर अगले दिन (20 अप्रैल) सूर्योदय तक।
✨ इस दिन को ‘अबूझ मुहूर्त’ क्यों कहते हैं?
अक्षय तृतीया को शास्त्रों में ‘स्वयं सिद्ध मुहूर्त’ माना गया है। इसका अर्थ है कि इस दिन कोई भी शुभ काम (जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या नया व्यापार) शुरू करने के लिए आपको किसी पंडित से पंचांग दिखाने की आवश्यकता नहीं होती। यह पूरा दिन हर कार्य के लिए सर्वश्रेठ है।
🔱 पौराणिक इतिहास: क्यों है यह दिन इतना खास?
अक्षय तृतीया केवल सोना खरीदने का दिन नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक इतिहास छिपा है:
- सतयुग और त्रेतायुग का प्रारंभ: माना जाता है कि इसी दिन से सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी।
- परशुराम जयंती: भगवान विष्णु के छठे अवतार, भगवान परशुराम का जन्म इसी पावन तिथि पर हुआ था।
- मां गंगा का धरती पर आगमन: भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा इसी दिन स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरी थीं।
- अक्षय पात्र की कथा: महाभारत काल में भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को ‘अक्षय पात्र’ भेंट किया था, जिससे कभी भोजन समाप्त नहीं होता था।
- बद्रीनाथ के कपाट: हिमालय की गोद में बसे बद्रीनाथ धाम के कपाट भी पारंपरिक रूप से इसी दिन खुलते हैं।
💰 सुख-समृद्धि के लिए क्या करें?
- दान का महत्व: इस दिन जल से भरे कलश, पंखे, सत्तू, ककड़ी और वस्त्रों का दान करना महापुण्यदायी माना जाता है।
- स्वर्ण/चांदी की खरीदारी: लक्ष्मी जी को स्थिर करने के लिए लोग इस दिन सोने या चांदी के सिक्के/आभूषण खरीदते हैं।
- श्री यंत्र की स्थापना: अपने कार्यक्षेत्र या घर के मंदिर में लक्ष्मी-कुबेर और श्री यंत्र की पूजा करने से आर्थिक तंगी दूर होती है।
इस अक्षय तृतीया पर केवल भौतिक संपत्ति (सोना-चांदी) ही न जोड़ें, बल्कि ‘अक्षय विचार’ भी अपनाएं। किसी जरूरतमंद की मदद करें या एक पौधा लगाएं—क्योंकि प्रकृति के लिए किया गया निवेश ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ा ‘अक्षय’ उपहार है।
हिमालयन डॉन की ओर से आप सभी को अक्षय तृतीया की हार्दिक शुभकामनाएं!
आपका जीवन सुख, शांति और समृद्धि से सदा ‘अक्षय’ रहे।
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