BBN औद्योगिक क्षेत्र में कच्चे माल की कमी और उद्योगों में शटडाउन की सांकेतिक तस्वीर - हिमालयन डॉन न्यूज़।

संकट में हिमाचल का औद्योगिक हब: कच्चे माल की कीमतों में लगी आग, बंदी की कगार पर BBN क्षेत्र के उद्योग

Solan

बद्दी: हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन (बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़) इन दिनों अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। कच्चे माल की आसमान छूती कीमतों, मालभाड़े में भारी वृद्धि और आपूर्ति में कमी के कारण यहाँ के छोटे और मध्यम उद्योगों के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई इकाइयों ने 15-15 दिनों का शटडाउन लेना शुरू कर दिया है।

दवा उद्योग पर दोहरी मार: केवल सरकारी ऑर्डर तक सीमित

कच्चे माल की कीमतों में 30 से 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी ने दवा उद्योग की कमर तोड़ दी है। फाइन ड्रग एंड स्किन केयर के संचालक चिरंजीव ठाकुर के अनुसार, छोटे दवा उद्योग फिलहाल न माल खरीद पा रहे हैं और न ही बेच पा रहे हैं। उद्योगपति केवल सरकारी ऑर्डर्स को पूरा कर रहे हैं, वह भी इसलिए ताकि उन पर पेनाल्टी न लगे। आम जनता के लिए दवाइयों के नए ऑर्डर लेने से फिलहाल कंपनियां इनकार कर रही हैं।

पैकिंग और रॉ-मटेरियल के दाम हुए बेकाबू

पैकिंग मटेरियल और कच्चे माल की कीमतों में हुई वृद्धि ने उत्पादन लागत को दोगुना कर दिया है। प्रमुख आंकड़ों पर एक नजर:

सामग्रीपहले की कीमतवर्तमान कीमत
प्लास्टिक दाना₹80/किलो₹190/किलो
एल्यूमीनियम फॉयल₹400₹550
PVC₹115₹170
गत्ता (कॉरगेटेड बॉक्स)40% की वृद्धि
19KG कमर्शियल सिलेंडर₹1600₹2000

पोलो फार्मा के संचालक सुरेश कुमार गर्ग ने बताया कि हालात इतने खराब हैं कि उन्होंने अपने उद्योग को 15 दिन के लिए बंद कर दिया है।

रसद और ऊर्जा संकट: ‘घाटे का सौदा’ बना उद्योग

लघु उद्योग भारती के प्रदेश महासचिव संजीव शर्मा ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि व्यावसायिक एलपीजी की भारी किल्लत हो गई है, जिससे उद्योगों की कैंटीन चलाना और कामगारों का गुजारा करना मुश्किल हो गया है।

  • मालभाड़े में उछाल: दुर्गापुर से आने वाला स्क्रैप जो पहले ₹3500 प्रति क्विंटल आता था, अब ₹4200 तक पहुंच गया है।
  • मेंटेनेंस लागत: इंजन ऑयल, गियर ऑयल और ग्रीस की कीमतों में भी 10 से 15 फीसदी का उछाल आया है।

गत्ता उद्योग संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र जैन का कहना है कि पेपर और एलपीजी के दाम बढ़ने से डिब्बों की कीमतें बढ़ाना अब मजबूरी हो गया है। वर्तमान परिस्थितियों में उद्योग चलाना लाभ के बजाय ‘घाटे का सौदा’ साबित हो रहा है।

यदि सरकार और प्रशासन ने जल्द ही कच्चे माल की कीमतों और रसद आपूर्ति पर ध्यान नहीं दिया, तो बीबीएन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तालाबंदी और बेरोजगारी का खतरा पैदा हो सकता है।

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